֍:गांव लौटकर की खेती§ֆ:उत्तराखंड में रहने वाले नवीन पटवाल बीते दो सालों से इस मशरूम का ट्रायल कर रहे थे. उन्होंने यह कार्य ने अपने गांव वापस आकर शुरू कर दिया. उनकी मंशा है कि गांव को आबाद करने और लोगों को बेहतर स्वरोजगार देने के लिए गुच्छी मशरूम के क्षेत्र में कार्य करना है. नवीन पटवाल बताते हैं कि दिसंबर 2024 में इसकी शुरुआत हुई थी और तीन महीने बाद ही इसमें परिणाम आने शुरू हो गए हैं. §ֆ:नवीन ने कहा कि इस गुच्छी मशरूम को कम तापमान वाले स्थान पर उगाया जाता है. वह लंबे समय से इसको लेकर प्रयास कर रहे थे और कई समस्याएं भी उनके सामने आईं. लेकिन इन सभी समस्याओं को पार करते हुए उन्हें सफल परिणाम मिले हैं. भविष्य में वह इसे बड़े स्तर पर करना चाहते हैं. §֍:हजारों की है कीमत
§ֆ:नवीन ने कहा कि पौड़ी जनपद में जिस तरह से पलायन हो रहा है उसे रोकने के लिए यह उनकी एक शुरुआत है. भविष्य में अन्य लोगों को भी इस काम में जोड़ा जाने का पूरा प्रयास है. नवीन पटवाल की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में हुई थी. इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री की. हालांकि, साल 2007 से रुड़की में वह अलग-अलग तरह की मशरूम उगा रहे हैं. उनके दो बच्चे हैं और उनकी पत्नी भी मशरूम के काम में उनकी मदद करती हैं. औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी कीमत 40 से 50 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है. §देश-दुनिया में मशरूम का क्रेज बढ़ता जा रहा है. इसलिए बाजार में डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है. इसको देखते हुए देश के कई किसानों ने पारंपारिक खेती छोड़ मशरूम की खेती शुरु की है. आपको बता दें की मशरूम की यूं तो हजारों किस्में मौजूद हैं. जिसमें भारत में ऑयस्टर और बटन मशरूम जैसी किस्में तो बहुत से लोग उगाते हैं लेकिन कुछ अलग और अनोखी किस्मे भी हैं जो बहुत कम लोग उगाते हैं. इनमें से एक है गुच्छी मशरूम. विश्व भर में गुच्छी मशरूम उगाने में भारत ने तीसरा स्थान हासिल किया है. पहले और दूसरे स्थान पर चीन और फ्रांस का नाम आता है. लेकिन अब देश के उत्तराखंड राज्य के एक किसान ने पहली बार गुच्छी मशरूम की कमर्शियल खेती शुरु की है.

