केंद्र सरकार ने देश के किसानों को बड़ी राहत देते हुए खेती की जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई और उनके परिवहन की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस संबंध में ‘कृषि भूमि में पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम’ (Model Rules) जारी किए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि वानिकी (Agroforestry) के लिए प्रेरित करना और उन्हें अनावश्यक सरकारी औपचारिकताओं से मुक्ति दिलाना है।
नए नियम क्यों जरूरी थे?
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पेड़ों की कटाई और ट्रांसपोर्टेशन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाना।
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खेतों में पेड़ लगाकर किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना।
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स्थानीय स्तर पर इमारती लकड़ी की आपूर्ति को बढ़ावा देना और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाना।
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किसानों को बार-बार की परमिशन और सरकारी कागजी कार्रवाई से राहत देना।
अब किसानों को क्या सुविधा मिलेगी?
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किसान अब ऑनलाइन आवेदन के ज़रिए खेती की जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई की अनुमति ले सकेंगे।
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इसके लिए सरकार “राष्ट्रीय इमारती लकड़ी प्रबंधन प्रणाली (NTMS)” नाम से एक पोर्टल बना रही है।
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किसान इस पोर्टल पर अपनी जमीन, पेड़ों की प्रजाति, संख्या और तस्वीरों के साथ पंजीकरण कर सकेंगे।
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आवेदन के बाद संबंधित एजेंसियां खेत का निरीक्षण करेंगी और सब कुछ सही पाए जाने पर परमिट जारी कर देंगी।
किन पेड़ों की कटाई में मिलेगी छूट?
इस पहल में शीशम, सागौन, यूकेलिप्टस, पॉपलर जैसे वाणिज्यिक और मूल्यवान प्रजातियों को शामिल किया गया है। इससे इन प्रजातियों की खेती करने वाले किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकेगा।
राज्य सरकारों की भूमिका भी अहम
राज्य स्तर पर गठित समितियां इन नियमों को लागू करने में सहयोग करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि किसानों को पूरी जानकारी दी जाए और प्रक्रिया में कोई अड़चन न आए।
इसका किसानों को क्या सीधा फायदा होगा?
अब खेत में पेड़ काटने के लिए किसानों को लंबी सरकारी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। सरल और ऑनलाइन सिस्टम की मदद से वे कानूनी तरीके से कटाई और बिक्री कर सकेंगे। इससे आमदनी बढ़ेगी, वनों पर दबाव घटेगा, और पर्यावरण को लाभ मिलेगा।

