जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) तथा यूनिसेफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत के इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, विकास भागीदार, विषय विशेषज्ञ तथा मिशन निदेशक शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य था स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (SBM-G) की अब तक की प्रगति की समीक्षा करना और इसके अगले चरण के लिए स्पष्ट दिशा तय करना।
कार्यशाला में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने कहा, “स्वच्छता केवल बुनियादी ढांचे की बात नहीं है, यह गरिमा, समानता और स्थायित्व से जुड़ी है। इस कार्यक्रम और नई कार्यप्रणालियों के शुभारंभ से यह स्पष्ट होता है कि सरकार हर वर्ग तक सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, विशेषकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए।”
जारी किए गए दो महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल
कार्यशाला के दौरान दो तकनीकी दस्तावेज जारी किए गए, जो भारत में ग्रामीण स्वच्छता प्रणाली को अधिक सुरक्षित, समावेशी और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं:
- ग्रामीण भारत में स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs)
- जलवायु अनुकूल स्वच्छता तकनीकी डिज़ाइन और सेवाओं के विकास हेतु प्रोटोकॉल
यूनिसेफ की चीफ WASH एवं क्लाइमेट चेंज विशेषज्ञ श्रीमती करिना मल्ज़वेस्का ने कहा कि अब समय आ गया है जब हम सुरक्षित और समावेशी स्वच्छता से आगे बढ़कर जलवायु-लचीली और भविष्य के लिए तैयार व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाएं।
पंचायतें बनीं स्वच्छता नेतृत्व का केंद्र
पंचायती राज मंत्रालय के अपर सचिव श्री सुशील कुमार लोहानी ने कार्यशाला में ‘स्थायी स्वच्छता के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त करना‘ विषय पर सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें अब थीमैटिक विकास योजनाएं बना रही हैं और e-GramSwaraj पोर्टल के माध्यम से अपने प्रदर्शन को ट्रैक कर रही हैं।
सत्र में “स्वच्छ और हरित पंचायत” पहल को रेखांकित किया गया, जो कचरा प्रबंधन, ग्रे वॉटर पुनः उपयोग और समावेशी शौचालय ढांचे के माध्यम से स्थानीय निकायों को नेतृत्व की भूमिका में ला रहा है। इस अवसर पर पुरस्कृत पंचायतों के उत्कृष्ट कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया, जिनमें 100% कचरा पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, पर्यावरण-अनुकूल कार्यप्रणाली और सुरक्षित शौचालय व्यवस्था शामिल थीं।
SBM-G की प्रगति की समीक्षा
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की समीक्षा रिपोर्ट में कई अहम आंकड़े सामने आए:
- 80% गांवों ने ODF प्लस मॉडल का दर्जा प्राप्त किया है, हालांकि इनमें से केवल 54% का ही सत्यापन हुआ है।
- ग्रे वॉटर प्रबंधन का कवरेज 91% तक पहुंच चुका है, जिसमें 20 से अधिक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने 95% से अधिक लक्ष्य हासिल किया है।
- ठोस कचरा प्रबंधन का कवरेज 87%, जबकि प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में 70% ब्लॉक स्तर तक पहुंच हासिल हुई है, हालांकि कार्यान्वयन की गुणवत्ता पर अब भी ध्यान देने की जरूरत है।
SBM-G के 10 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कार्यशाला में यह संकल्प लिया गया कि मिशन का अगला चरण स्थानीय नेतृत्व आधारित, जलवायु स्मार्ट नवाचारों से सुसज्जित और स्थायी विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़ा होगा। मिशन की मूल आत्मा — एकीकरण, निगरानी और व्यवहार परिवर्तन को मजबूत करते हुए भारत को एक स्वच्छ, स्वस्थ और समतामूलक ग्रामीण समाज की ओर अग्रसर किया जाएगा।
यह कार्यशाला एक बार फिर साबित करती है कि भारत की ग्रामीण स्वच्छता यात्रा अब केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक समग्र, संवेदनशील और टिकाऊ विकास का अभियान बन चुकी है।

