֍:फिशरीज सेक्टर की परेशानियों का समाधान है स्टार्ट-अप§ֆ:फिशरीज सेक्टर में प्रगति लाने को लेकर हाल ही में स्टार्ट-अप और मत्स्य विभाग की एक मीटिंग आयोजित हुई थी. इस दौरान संयुक्त सचिव (मरीन फिशरीज) नीतू कुमारी प्रसाद ने स्टार्टअप्स को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वक्त को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि फिशरीज सेक्टर में स्टार्टअप्स चार खास क्षेत्र जैसे फीड लागत में कमी, गुणवत्ता वाले बीज की उपलब्धता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मार्केटिंग और रेग्यूलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) पर काम करना होगा. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो आज बाजार में ऐसे सीफूड की जरूरत है जो सस्ता हो, क्वालिटी का हो और साथ में बाजार में हर जगह मिल जाए. §भारत में स्टार्ट-अप तेजी से प्रगति की ओर जाते दिख रहे हैं. जिसे लेकर केंद्र सरकार ने बजट 2025 में स्टार्ट-अप के लिए 20 हजार करोड़ का बजट दिया है. सरकार के इस ऐलान को डेयरी और फिशरीज के लिए भी अहम माना जा रहा है. साथ ही युवाओं के लिए नौकरी समेत कारोबार के लिए एक अच्छा रास्ता बताया जा रहा है. इसे लेकर इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आरएस सोढी का कहना है कि आने वाले सात-आठ साल में डेयरी, पशुपालन, फिशरीज और पोल्ट्री सेक्टर में बड़ा बदलाव आने वाला है. हजारों करोड़ रुपये का इंवेस्ट होगा. शहर और गांव में रोजगार के मौके मिलेंगे. वहीं डेयरी और पशुपालन एक्सपर्ट का मानना है कि इसके लिए इस सेक्टर से जुड़ी तमाम तरह की परेशानियों को दूर करना होगा.

