֍:40 फीसदी किसानों के पास जमीन नहीं §ֆ:अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी के हवाले से लिखा है, ‘अगले सीजन से हम किसानों को मुआवजे के भुगतान के लिए राज्य सरकारों के साथ एस्क्रो खाते खोलेंगे ताकि राज्य समय पर अपने हिस्से का भुगतान कर सकें.’ उन्होंने यह बात शुक्रवार को हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन से इतर कही. वर्तमान समय में जो स्थिति है उसके अनुसार देश के 14 करोड़ किसानों में से 4.1 करोड़ किसान फसल बीमा योजना के तहत आते हैं जबकि सकल फसल क्षेत्र का 40 फीसदी कवर किया गया है. वहीं करीब 40 फीसदी ऐसे किसान हैं जिनके पास जमीन नहीं है और वो पट्टे पर खेती करते हैं. §֍:पीएम किसान की तर्ज पर मुआवजा! §֍:§ֆ:कहा जा रहा है कि फसल बीमा के तहत मुआवजे के भुगतान की तारीखें भी पीएम-किसान की तर्ज पर तय करने की योजना है. गौरतलब है कि पीएम किसान के तहत किसानों को तीन बराबर किश्तों में 6000 रुपये हर साल ट्रांसफर किए जाते हैं. चतुर्वेदी के अनुसार फसल नुकसान के लिए किसानों को मुआवजे के भुगतान में देरी इसलिए होती है क्योंकि कई राज्य समय पर रकम आवंटित नहीं करते हैं. सूत्रों ने बताया है कि नौ साल पहले योजना शुरू होने के बाद से राज्यों द्वारा दावों के निपटान में करीब 4,440 करोड़ रुपये की चूक रही है. §सरकार आने वाले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) पर एक बड़ा फैसला ले सकती है. जो खबरें आ रही हैं उसके अनुसार केंद्र सरकार इस योजना के दायरे को बढ़ाने की योजना बना रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार इस फसल बीमा के दायरे में किराये पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान, ऐसे लोग जो पशुपालन से जुड़े हैं और ऐसे जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड है (केसीसी) है, उन्हें भी शामिल कर सकती है. माना जा रहा है कि सरकार का यह फैसला लाखों लोगों को इस योजना का फायदा पहुंचा सकेगा और निर्णय से बीमा के तहत आने वाले क्षेत्र का विस्तार भी हो सकेगा.

