֍:खेती का तरीका होगा आसान §ֆ:ऐसे में खेती किसानी बेहद ही किसान भाइयों के लिए चुनौती पूर्ण माना जाता है. इसके पीछे का मुख्य कारण यह है की उपज के उत्पादन के लिए तापमान एक समान रहना चाहिए. जिसमें सब्जियां सबसे आगे है. ऐसे में किसानों की राह को शेड नेट खेती आसान बनाती है.
जानकारी देते हुए जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि कि अगर किसान पॉलीहाउस या ग्रीन शेड्नेट में खेती करना चाहते हैं तो उन्हें अभी से यह योजना बनानी होगी. उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस में खेती करना चाहते हैं उसके लिए एक स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है .इस स्ट्रक्चर में बाहर से आई कंपनियों के द्वारा सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया जाता है जिसमें पानी को फिल्टर करके पौधों तक पहुंचाया जाता है. ड्रिप सिस्टम के जरिए ही पौधों को उर्वरक भी दिया जाता है तापमान को कंट्रोल करने के लिए स्प्रिंगकलर और फोर्सर को लगाया जाता है. लोगों की जरूरत के हिसाब से ऑफ सीजन या बाजार की मांग के अनुसार फसलों का 11 महीने तक आसानी से उत्पादन लिया जा सकता है .
§֍:50 ℅ तक का मिलेगा अनुदान§ֆ:जिला उद्यान पदाधिकारी डॉक्टर राहुल कुमार ने कहा कि शेड नेट हाउस में रोशनी आदि कम अंदर आ पाती है या गर्मी और ठंड के मौसम में फसलों की लगाने के लिए अच्छा होता है. गर्मी में सूर्य के विकरन और उच्च तापमान के कारण सब्जियों की खेती करना मुश्किल होता है. लेकिन किसान साल भर से शेडनेट से पूरे साल सब्जी पालक, धनिया, पुदीना, टमाटर एवं पत्तेदार सब्जियां एवं शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर, बैंगन आदि की खेती आसानी से कर सकते हैं. हालांकि इसके अंदर फल फूल और सब्जियों की खेती आसानी से होगी.
§֍:कम से कम इतनी खेती होना होगा जरूरी§ֆ:पूर्णिया के जिला उद्यान पदाधिकारी राहुल कुमार कहते हैं कि किसान भाइयों के लिए पॉलीहाउस या शेडनेस की खेती बहुत ही कारगर साबित होता है. दरअसल पॉलीहाउस या शेडनेट की खेती करने पर बिहार सरकार के द्वारा सब्सिडी का प्रावधान दिया गया है.
पॉली हाउस की खेती करने के लिए 935 पर स्क्वायर फुट पर सरकार 467 रुपया प्रति स्क्वायर फीट सब्सिडी देती हैं. जबकि लागत मूल्य का आधा किसानों को लगता हैं. हालांकि इसके लिए मिनिमम 500 स्क्वायर मीटर और मैक्सिमम 4000 स्क्वायर मीटर जमीन तक की खेती के किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं. शेड्नेट में की हुई खेती का फसल तकरीबन 11 महीने तक बेहतर उत्पादन और कीमत मिलेगा.
§परंपरागत खेती की तुलना में पॉलीहाउस और शेड-नेट से सब्जियों की खेती में 5 से 10 गुना तक का उत्पादन ज्यादा लिया जा सकता है. दरअसल, पॉलीहाउस और शेड नेट की तकनीकी थोड़ी महंगी है मगर परंपरागत खेती के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा पैदावार के साथ मुनाफा लिया जा सकता है.
भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है भारत में संस्कृति से लेकर जलवायु तक विविधता देखी जाती है. मसलन देश में देश में तापमान 1 डिग्री से लेकर 48 डिग्री तक दर्ज किया जाता है. वहीं उत्तर भारत की अधिकतर राज्यों में अप्रैल से जुलाई तक गर्म, जुलाई से अक्टूबर तक बरसात और नवंबर से फरवरी तक बहुत ठंडा रहता है.

