֍:GI टैग से मिलेगी फसलों को विशेष पहचान, बढ़ेगी कीमत और मांग§ֆ:किसी फसल को GI टैग मिलने के बाद उसे एक विशिष्ट भौगोलिक पहचान प्राप्त होती है। यह प्रमाण होता है कि वह फसल विशेष गुण, स्वाद, सुगंध या बनावट के साथ केवल उसी क्षेत्र में पाई जाती है। इससे उस फसल की मांग बढ़ जाती है और किसान उसे अधिक कीमत पर बेच सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी में सीधा इजाफा होता है। इसके साथ ही नकली और घटिया उत्पादों पर भी रोक लगती है। GI टैग मिलने के बाद स्थानीय परंपरागत खेती को भी बढ़ावा मिलता है और विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान हो जाती है। इससे किसानों को वैश्विक मंच पर पहचान और आर्थिक अवसर दोनों मिलते हैं।§֍:मंडियों के आधुनिकीकरण पर मुख्यमंत्री का फोकस§ֆ:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की मंडियों के प्रबंधन को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी मंडियों का आकस्मिक निरीक्षण विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से कराया जाए। साथ ही, कृषि उपज के अनुसार अलग-अलग मंडियों की स्थापना का रोडमैप तैयार किया जाए — जैसे फल-सब्जी मंडी, मसाला मंडी और मोटा अनाज मंडी।सीएम ने यह भी कहा कि मंडी शुल्क की प्राप्त राशि का उपयोग किसानों के कल्याण के लिए किया जाए। सभी मंडियों को आदर्श बनाया जाए जहां किसानों को फसल बेचने में कोई परेशानी न हो और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिले।§֍:ई-मंडी प्रणाली लागू, अब सभी 259 मंडियों में डिजिटल रिकॉर्ड§ֆ:बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1 अप्रैल 2025 से ई-अनुज्ञा प्रणाली के साथ-साथ ई-मंडी योजना को भी लागू कर दिया गया है। इससे अब राज्य की सभी 259 मंडियों में फसल विक्रय और खरीद का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से रखा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।§֍:नरसिंहपुर और सतना में होंगे विशाल कृषि मेले और सम्मेलन§ֆ:मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी 26, 27 और 28 मई को नरसिंहपुर जिले में कृषि आधारित उद्योग सम्मेलन व विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। इसमें दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, बागवानी, उन्नत बीज, खाद-उर्वरक व कृषि यंत्रों की जानकारी और प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 8 से 10 जून 2025 तक सतना में भी विशाल कृषि मेला सह कृषक सम्मेलन प्रस्तावित है, जिसमें राज्यभर के किसान और कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे।§मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य में उत्पादित तीन विशिष्ट फसलों को जल्द ही जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिलने की संभावना है। डिंडोरी जिले की नागदमन मकुटकी, सिताही कुटकी और बैंगनी अरहर की फसलें GI टैग परीक्षण प्रक्रिया में हैं। कृषि सचिव ने जानकारी दी कि परीक्षण प्रक्रिया पूर्ण होते ही इन फसलों को GI टैग प्रदान कर दिया जाएगा।

