गंगा एक बार फिर रौद्र रूप में आ गई हैं। जलस्तर में ठहराव के बाद तेजी से हो रही वृद्धि ने पूरे शहर को अलर्ट मोड में ला दिया है। गुरुवार रात से अब तक जलस्तर में 83 सेमी की तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है, और यह सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। गंगा फिलहाल 69.54 मीटर पर बह रही हैं और चेतावनी बिंदु के बेहद करीब हैं। पांच सेमी प्रति घंटे की गति से बढ़ता जलस्तर अगर यूं ही जारी रहा तो आधी रात तक चेतावनी बिंदु पार कर सकती हैं।
शुक्रवार दोपहर को दशाश्वमेध घाट पर बने जल पुलिस के बूथ और गंगा मंदिर में पानी घुस गया, जिससे पुलिसकर्मियों ने अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया।
मणिकर्णिका घाट बना जलसमाधि स्थल
मणिकर्णिका घाट की गलियों में पानी भर चुका है। दुकानें बंद हो गई हैं और अब वहां नावें चलने लगी हैं। घाट की सीढ़ियों पर ही शवों का अंतिम स्नान कराया जा रहा है और अब छतों पर शवदाह किया जा रहा है। शवों की कतार लग गई है, जिससे हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं।
अस्सी घाट और जज हाउस भी खतरे में
पुराने अस्सी घाट की गलियों में बाढ़ का पानी बह रहा है, जबकि नया अस्सी घाट पर “सुबह-ए-बनारस” का मंच जलमग्न हो चुका है। सड़क तक पहुंचने में अब महज आठ सीढ़ियां बाकी हैं। सामने घाट पर निर्माणाधीन गुंबद तक पानी पहुंच गया है और जज हाउस की सीढ़ियों के ऊपर से बह रहा है। इससे तटवर्ती बस्तियों के लोग घबराए हुए हैं और सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन शुरू हो गया है।
वरुणा में भी तबाही, गंध और संक्रमण का खतरा
वरुणा नदी भी पलट प्रवाह से उफन रही है और उससे जुड़े नालों के जरिए नए इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। शुक्रवार को धूप निकलते ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़न और दुर्गंध से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया। नगर निगम की ओर से अब तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।
20 घंटे में 83 सेमी की बढ़त
गुरुवार रात 8 बजे गंगा का जलस्तर 68.71 मीटर था, जो शुक्रवार सुबह 8 बजे तक 69.20 मीटर तक पहुंच गया। इसके बाद शाम चार बजे तक यह 69.54 मीटर पर जा पहुंचा। बाढ़ की इस रफ्तार ने प्रशासन और आमजन को चिंता में डाल दिया है।

