केंद्र सरकार की 10,000 किसान उत्पादक संगठन के गठन और संवर्धन योजना के तहत अब तक 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPO) पंजीकृत किए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक एफपीओ को 3 वर्षों में ₹18 लाख का प्रबंधन व्यय, प्रति किसान ₹2,000 की दर से अधिकतम ₹15 लाख की इक्विटी ग्रांट, और पात्र ऋण संस्थानों से परियोजना ऋण के लिए ₹2 करोड़ तक की क्रेडिट गारंटी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इन एफपीओ को बीज, उर्वरक, कीटनाशक, मंडी लाइसेंस आदि प्राप्त कराने में सहायता कर रही हैं, ताकि वे एक पूर्ण कृषि व्यवसाय इकाई के रूप में कार्य कर सकें। एफपीओ को ई-नाम (Electronic National Agriculture Market), ओएनडीसी (Open Network for Digital Commerce) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें डिजिटल बाजारों तक पहुंच मिल सके।
योजना के तहत सभी हितधारकों के लिए डिजिटल मोड में प्रशिक्षण की व्यवस्था है, ताकि वे अपनी गति से कौशल विकास कर सकें। इसके अलावा, हर सप्ताह वेबिनार आयोजित किए जाते हैं, जिनमें सरकारी योजनाओं की जानकारी और बाजार संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
इन पहलों का सकारात्मक असर सामने आया है, 30 जून 2025 तक एफपीओ का कुल कारोबार ₹5,035.5 करोड़ तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें संगठित और प्रतिस्पर्धी बाजार में सशक्त बनाएगी।

