जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता सत्यपाल मलिक का आज दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में निधन हो गया। 79 वर्षीय मलिक लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और 11 मई से अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन का समाचार उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट (@SatyapalMalik6) से साझा किया गया।
एक ऐतिहासिक कार्यकाल का अंत
सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल थे, जिनके कार्यकाल (अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019) में 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया था। संयोग से, आज ही इस ऐतिहासिक फैसले की छठी वर्षगांठ थी और इसी दिन मलिक ने अंतिम सांस ली।
राजनीतिक सफर: छात्र नेता से गवर्नर तक
मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में एक जाट परिवार में हुआ था। मेरठ विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक और एलएलबी की डिग्री प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 1968-69 में छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।
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1974-77: उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य (बागपत से)।
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1980-89: राज्यसभा सांसद (लोकदल और कांग्रेस से)।
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1989-91: अलीगढ़ से लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री (वी.पी. सिंह सरकार में)।
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2017-2022: बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल।
विवाद और मोदी सरकार से मतभेद
मलिक ने अपने कार्यकाल के दौरान कई विवादों को जन्म दिया:
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पुलवामा हमले पर आरोप: उन्होंने 2023 में दावा किया कि 2019 के पुलवामा हमले (जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए) में केंद्र की लापरवाही थी और उन्हें मोदी सरकार ने चुप रहने का निर्देश दिया था।
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भ्रष्टाचार के आरोप: जम्मू-कश्मीर में गवर्नर रहते हुए उन्होंने दो फाइलों पर 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश होने का दावा किया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया6। हालांकि, बाद में CBI ने उन पर किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 2,200 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया।
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किसान आंदोलन का समर्थन: 2020-21 में उन्होंने किसान आंदोलन का खुलकर समर्थन किया और केंद्र सरकार की आलोचना की।
राजनीतिक गलियारों में शोक
दुष्यंत चौटाला, राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। चौटाला ने उन्हें “किसान हितैषी और निर्भीक नेता” बताया1, जबकि राहुल गांधी ने मई 2025 में अस्पताल में उनसे मुलाकात भी की थी।
अंतिम विदाई
मलिक के निधन से भारतीय राजनीति के एक जुझारू और विवादास्पद चेहरे का अध्याय समाप्त हो गया। उनका अंतिम संस्कार उनके गृहनगर बागपत में किया जाएगा।

