֍:ड्रोन के सहारे बढ़ेगा मछलीपान §ֆ:कोस्टल एरिया में मछली ट्रांसपोर्टेशन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो तालाब के मछली पालन में मछलियों को हाथ से दाना खिलाने और थर्मामीटर से तालाब के पानी का तापमान मापने का तरीका अब पुराना हो चला है. इतना ही नहीं तालाब में जाल डालकर मछलियों की सेहत पर नजर रखने का तरीका भी बदल गया है. अब ये सारे काम एसी कमरे में लैपटॉप के सामने बैठकर एक क्लिक पर होने लगे हैं.
§֍:फिश लैंडिंग सेंटर पर इस्तेमाल होंगे ड्रोन §ֆ:ज्वाइंट सेक्रेटरी, केंद्रीय मत्स्यपालन विभाग सागर मेहरा ने बताया कि मछली पालन में ड्रोन इस्तेमाल करने की योजना पर काम चल रहा है. अगर कोस्टल एरिया की बात करें तो फिश लैंडिंग सेंटर पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. कोस्टल एरिया वाले राज्य में एक से ज्यादा लैंडिंग सेंटर होते हैं. ऐसे में कई बार एक सेंटर से दूसरे सेंटर पर मछली पहुंचानी होती है. 50-100 किलो मछली को बोट से पहुंचाने में लागत ज्यादा आएगी और वक्त भी लगेगा. ऐसे में ड्रोन की मदद से उस मछली को एक सेंटर से दूसरे सेंटर पर पहुंचा दिया जाएगा.
§मछली पालन को अब हाईटेक करने की तैयारी चल रही है. मकसद है फ्रेश मछली बाजार तक आए और मछली पालक की लागत कम कर मुनाफा बढ़ाना. हाल ही में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में हुए एक कार्यक्रम के दौरान ये जानकारी सेक्रेटरी अभिलक्ष लिखी ने दी. उन्होंने बताया कि इसके लिए मंत्रालय टेक्नोलॉजी से जुड़ी दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है. मरीन फिशरीज से जुड़े काम में ड्रोन का इस्तेमाल करने के साथ ही तालाब में मछली पालन के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल करने की तैयारी है.

