देश में मछली पालन को संगठित और सशक्त रूप देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने नेशनल फिश फार्मर डे के मौके पर भुवनेश्वर, ओडिशा में 17 नए समूह आधारित जल कृषि मॉडल (Group-Based Aquaculture Models) की घोषणा की। इसके साथ ही अब देश में ऐसे समूहों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है।मंत्री ने बताया कि भारत आज विश्व में मछली उत्पादन में दूसरे नंबर पर है और इसमें से 75% उत्पादन इनलैंड फिशरीज के जरिए हो रहा है। इस क्षेत्र में देश के करीब 3 करोड़ मछुआरे और मछली पालक सीधे तौर पर जुड़े हैं।
70 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
इस अवसर पर 11 राज्यों के लिए कुल 105 करोड़ रुपये की लागत वाली 70 मत्स्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत चलाई जाएंगी। इस योजना के लिए अब तक 38,572 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जा चुका है।
कौन-कौन से राज्य होंगे शामिल?
घोषित 17 नए समूह देश के अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में विकसित किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- · पंजाब, राजस्थान: खारे पानी में जलीय कृषि
- · उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख: ठंडे पानी में मत्स्य पालन
- · पश्चिम बंगाल: शुष्क मछली समूह
- · पुडुचेरी: मछली पकड़ने का बंदरगाह
- · नागालैंड: एकीकृत मछली पालन
- · मणिपुर: पेंगबा मछली क्लस्टर
- · असम: नदी मत्स्य समूह
- · मिजोरम: धान सह मछली समूह
- · अरुणाचल प्रदेश: एक्वा टूरिज्म
- · गोवा: मुहाना पिंजरा समूह
- · त्रिपुरा: पाबड़ा मछली समूह
- · महाराष्ट्र: मछली सहकारी समूह
- मेघालय:जैविक मछली समूह
पहले से चल रहे ग्रुप कहां-कहां?
देश में पहले से चल रहे 17 समूहों में शामिल हैं:हजारीबाग (पर्ल), लक्षद्वीप (समुद्री शैवाल), मदुरै (सजावटी मछली), मध्य प्रदेश (जलाशय मछली पालन), गुजरात (बंदरगाह), सिरसा (खारे पानी), जम्मू-कश्मीर (ठंडा पानी), कर्नाटक (समुद्री पिंजरा), आंध्र प्रदेश (खारा पानी), अंडमान-निकोबार (टूना), छत्तीसगढ़ (तिलापिया), सिक्किम (ऑर्गेनिक), बिहार (आर्द्रभूमि), तेलंगाना (मुर्रेल), केरल (पर्ल स्पॉट), ओडिशा (स्कैम्पी), उत्तर प्रदेश (पंगेशियस)।
मछुआरों के लिए सलाह
कार्यक्रम में मछुआरों और मछली पालकों को बीमा योजनाओं, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता का लाभ उठाने की अपील की गई, जिससे वे अपनी आजीविका मजबूत कर सकें और आय में वृद्धि हो सके।
प्रधानमंत्री मछली संपदा योजना न केवल मछली उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि मछुआरों की आय और जीवन स्तर को भी बेहतर बना रही है। नए समूह आधारित मॉडल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और ‘ब्लू इकोनॉमी’ की ओर भारत का कदम और सशक्त होगा।

