֍:Shalini CNH-17395 Cotton§ֆ:कपास की शालिनी CNH-17395 किस्मर बारिश पर आधारित खरीफ फसल है. इसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्रै और गुजरात में खेती के लिए उपयुक्तत बताया है. इसका रंग भूरा होता है, जो हथकरघा बुनाई के लिए विकसित की गई है. इससे प्रति हेक्टेतयर 14.41 क्विंटल उपज हासिल की जा सकती है. इसकी फसल 160 से 165 दिनों में तैयार हो जाती है.§֍:CICR-H Bt Cotton 65§ֆ:सीआईसीआर-एच बीटी कॉटन 65 बारिश आधारित खेती के लिए बेस्टप है. इससे 15.47 क्विंटल/हेक्टेयर पैदावार हासिल की जा सकती है. इसकी फसल परिपक्वता अवधि 140-150 दिन की है. ज्या दातर रोगों में जीवाणुजनित अंगमारी, ग्रे फफूंद, अल्टरनेरिया, कोरिनोस्पोरा पत्ती धब्बा, मायरोथसीयम के प्रति प्रतिरोधी है. यह जैसिड्स, एफिड्स, थ्रिप्स, लीफ हॉपर जैसे कीटों के प्रति सहनशील है. §֍:CICR-H Bt Cotton 40 §ֆ:सीआईसीआर-एच बीटी कॉटन 40 बारिश आधारित खेती के अनुकूल है. इससे 17.30 क्विंटल/हेक्टेयर उपज हासिल की जा सकती है. इसकी फसल को पकने में 140 से 150 दिन का समय लगता है. यह जैसिड, थ्रिप्स, व्हाइटफ्लाई, एफिड्स कीटों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके साथ जीवाणु पत्ती झुलसा, अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा, ग्रे फफूंद से लड़ने में सक्षम है. यह साउथ ज़ोन के राज्योंी तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में खेती के लिए बेस्ट है.§֍:CNH-18529 Cotton§ֆ:सीएनएच- 18529 कपास मध्य क्षेत्र की वर्षा आधारित और सिंचित खेती के लिए विकसित किया गया है. इससे 10.11 क्विंटल/हेक्टेयर उपज हासिल की जा सकती है और तैयार होने में 160-165 दिन का समय लगता है. कपास की यह किस्मक एफिड्स, जैसिड्स, व्हाइटफ्लाई, थ्रिप्स, हेलियोथिस आर्मीजेरा, गुलाबी बॉलवर्म के प्रति सहनशील है. यह छत्ती1सगढ़, मध्यम प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में खेती के लिए बेस्ट है.
§देश-विदेश में कपास बाजार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके लिए दुनियाभर में कॉटन फैब्रिक की भारी डिमांड रहती है. भारत में कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित आईसीएआर के केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान ने कपास की चार हाइब्रिड किस्में विकसित की हैं. इस किस्मों को पीएम नरेंद्र मोदी ने अगस्तक 2024 में जारी किया था. इन कपास किस्मों की खेती से अच्छा लाभ हो सकता है. ये नई किस्में अलग-अलग इस्तेमाल और जलवायु के हिसाब से विकसित की गई हैं, जो कई प्रकार के रोगों से लड़ने में सक्षम है.

