֍:मिलेगी सब्सिडी§ֆ:इस योजना के तहत फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए सरकार कृषकों को 60 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है. इसमें छोटे और सीमांत किसान भी शामिल हैं. जिन्हें, 60 प्रतिशत यानि 48000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी. साथ ही मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना के तहत 8000 रुपये का अतिरिक्त अनुमान भी दिया जाएगा. किसानों को 50 प्रतिशत यानि 40 हजार तक की सब्सिडी दी जाती है. किसानों के समूह आवेदन पर 10 या उससे ज़्यादा किसान मिलकर 5 हेक्टेयर ज़मीन पर बाड़ लगा सकते हैं. ऐसे में हर किसान को 400 मीटर की लंबाई के हिसाब से 70% सब्सिडी दी जाती है.§֍:क्या हैं योजना के लाभ?§ֆ:• बाड़ लगाने से फसलों को मवेशियों से बचाया जा सकता है.
• सरकार 60% सब्सिडी देती है, जिससे किसान को केवल 40% खर्च उठाना पड़ता है.
• हल्का बिजली का झटका लगने पर जानवर फसलों तक नहीं पहुंच पाते.
• यूपी तारबंदी योजना के लिए पात्रता
• इस योजना का लाभ केवल यूपी के स्थायी निवासी ही उठा सकते हैं.
• योजना का लाभ केवल किसानों को ही मिलेगा.
• आवेदक की आयु आवेदन करने के लिए कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए.
• आवेदक के पास खेती योग्य भूमि होनी चाहिए.
• आवेदक ने पहले इस योजना का लाभ नहीं उठाया हो.
§֍:इन दस्तावेजों की होगी जरूरत§ֆ:• आधार कार्ड
• खेत संबंधित दस्तावेज
• निवास प्रमाण पत्र
• पासपोर्ट साइज फोटो
• मोबाइल नंबर
• खसरा–खतौन
• बिजली का बिल
• बैंक खाता नंबर
§֍:ऐसे करें आवेदन §ֆ:• तारबंदी योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करें.
• सबसे पहले यूपी कृषि विभाग की वेबसाइट (http://upagriculture.com) पर जाएं.
• इसके बाद “टोकन बनाएं” बटन पर क्लिक करें.
• नया फार्म खुलने पर आवश्यक विवरण भरकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें.
• टोकन जनरेट करने के बाद, पक्का बिल और अन्य उपयोगी जानकारी भरें.
• सारी जानकारी ध्यान से भरने के बाद, “भेजें” (submit) बटन पर क्लिक करें.
• इस तरह आप आसानी से यूपी तारबंदी योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपनी फसलों को सुरक्षित बना सकते हैं.
§खेती में किसानों की एक बड़ी समस्या फसल को खराब करने वाले आवारा और जंगली पशु भी हैं. इसको लेकर सरकार तेजी से कर्य कर रही है और नई-नई योजनाओं से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इसी कड़ी में तारबंदी योजना की शुरुआत की गई है. इसमें कंटीले तारों से खेत का घेराव कर फसल का बचाव कर सकते हैं. इसकी मदद से जंगली जानवर खेतों में नहीं घुस पाते और फसलों को नुकसान नहीं पहुंचता.

