֍:मक्का की खेती के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
§ֆ:उन्नत किस्मों का चयन – डेक्कन, प्रताप मक्का, नवजोत जैसी उन्नत किस्में इस मौसम में बेहतर उत्पादन देती हैं।
बुआई का समय – जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक बुआई करना उचित रहता है।
मिट्टी की तैयारी – अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी मक्का के लिए सर्वोत्तम होती है। खेत की गहरी जुताई करके उसमें जैविक खाद मिलाएं।
सिंचाई प्रबंधन – बारिश न होने पर समय-समय पर सिंचाई करें, विशेषकर फूल आने और दाना बनने के दौरान।
खरपतवार नियंत्रण – निराई-गुड़ाई या हर्बिसाइड्स का उपयोग कर खरपतवारों को नियंत्रित करें।
§֍:पशुओं को रोगों से बचाने के उपाय
§ֆ:गर्मी और बरसात के मौसम में पशुओं में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। पशुपालकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
साफ-सफाई – पशुशाला को नियमित रूप से साफ करें और कीटाणुनाशकों का छिड़काव करें।
संतुलित आहार – पशुओं को ताजा एवं पौष्टिक चारा दें, सड़ा हुआ या गीला चारा न डालें।
टीकाकरण – लंगड़ी खांसी, खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण करवाएं।
पानी की व्यवस्था – साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं, जलजमाव से बचें।
§ֆ:कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार खेती की योजना बनाने का आग्रह किया है। साथ ही, पशुपालकों को पशु चिकित्सकों से नियमित संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है।
§जून का महीना मक्का की बुआई के लिए उपयुक्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय मौसम की स्थिति मक्का की अच्छी पैदावार के लिए अनुकूल होती है। साथ ही, पशुपालकों को गर्मी और बरसात के मौसम में पशुओं को रोगों से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

