֍:किसान इस मौसम में करें अदरक की खेती §ֆ:किसानों को अदरक की खेती को एक ही भूमि पर लगातार नहीं लगाना चाहिए. अदरक की फसल को सिंचाई की अवस्था होने पर फरवरी मार्च तथा असिंचित अवस्था पर मई-जून में लगाया जा सकता है. इसके बाद अदरक की फसल को तैयार होने में 8 से 9 महीने का समय लग सकता है. एक हेक्टेयर में पैदावार 150 से 200 क्विंटल तक हो जाती है. एक हेक्टेयर में करीब 7-8 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है.
§֍:अदरक में कौन सी खाद डालनी चाहिए?§ֆ:अदरक एक लम्बी अवधि की फसल है. जिसे अधिक पोषक तत्चों की आवश्यकता होती है. उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के बाद करना चाहिए. खेत तैयार करते समय 250-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सड़ी हई गोबर या कम्पोस्ट की खाद खेत में सामान्य रूप से फैलाकर मिला देना चाहिए.
§֍:कैसी होनी चाहिए जलवायु§ֆ:अदरक की खेती गर्म और आर्द्रता वाले स्थानों में की जाती है. मध्यम वर्षा बुवाई के समय अदरक की गाँठों (राइजोम) के जमाने के लिए आवश्यक होती है. इसके बाद थोडा ज्यादा वर्षा पौधों को वृद्धि के लिए तथा इसकी खुदाई के एक माह पूर्व सूखे मौसम की आवश्यकता होती है. अगेती वुवाई या रोपण अदरक की सफल खेती के लिए अति आवश्यक है.उचित जल निकास रहित स्थानों पर खेती को भारी नुकसान होता है. औसत तापमान 25 डिग्री सेन्टीग्रेट, गर्मियों में 35 डिग्री सेन्टीग्रेट तापमान वाले स्थानों पर इसकी खेती बागों में की जा सकती है.
§֍:बुवाई का समय§ֆ:अदरक की बुबाई दक्षिण भारत में मॉनसून फसल के रूप में अप्रैल-मई में की जाती है जो दिसम्बर में परिपक्क होती है. जबकि मध्य एवं उत्तर भारत में अदरक एक शुष्क क्षेत्र फसल है, जो अप्रैल से जून माह तक वुवाई योग्य होती है. सबसे उपयुक्त समय 15 मई से 30 मई है. 15 जून के बाद वुवाई करने पर कंद सड़ने लगते हैं और अंकुरण पर प्रभाव बुरा पड़ता है.§भारतीय किसान अब पारंपरिक फसलों की खेती को छोड़कर कमर्शियल फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. अदरक की खेती भी इनमें से एक है. इन दिनों बाज़ार में अदरक का दाम किसानों को अच्छा मिल रहा है. अदरक को चाय से लेकर सब्जी बनाने तक में इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा इससे सौंठ बनाई जाती है, जिसका बाजार में कच्ची अदरक से ज्यादा भाव मिलता है. मार्केट में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. ऐसे में इसकी खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होती है. अदरक की खेती से किसान आसानी से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी खेती मार्च में शुरू कर देनी चाहिए.

