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Home कृषि समाचार

खरीफ के सीजन में कपास की खेती के लिए किसान अपनाएं ये तरीका, जानें बुआई से लेकर खरपत नियंत्रण की अहम जानकारी

Fiza by Fiza
May 13, 2025
in कृषि समाचार
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खरीफ के सीजन में कपास की खेती के लिए किसान अपनाएं ये तरीका, जानें बुआई से लेकर खरपत नियंत्रण की अहम जानकारी
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֍:1. कपास की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी§ֆ:• जलवायु: कपास को गर्म और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। इसे 20-30°C तापमान वाले क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। फसल के पकने के समय शुष्क मौसम अच्छा माना जाता है।
• मिट्टी: कपास के लिए काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी) सबसे उपयुक्त होती है, लेकिन यह दोमट और बलुई दोमट मिट्टी में भी उगाई जा सकती है। मिट्टी का pH मान 6 से 8 के बीच होना चाहिए।
§֍:2. कपास की उन्नत किस्में§ֆ:भारत में कपास की मुख्यतः दो प्रजातियाँ उगाई जाती हैं:
• देसी कपास (Gossypium arboreum & G. herbaceum): छोटे रेशे वाली, कम उपज देने वाली।
• अमेरिकन कपास (Gossypium hirsutum & G. barbadense): लंबे रेशे वाली, अधिक उपज देने वाली।
संकर (Hybrid) और Bt कपास की किस्में (जैसे Bt-2, Bt-3, RCH-2, Bunny, NCS-138) अधिक उपज और कीट प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं।§֍:3. ऐसे करें खेत की तैयारी§ֆ:• खेत को 2-3 बार जुताई करके भुरभुरा बना लें।
• पाटा लगाकर मिट्टी को समतल करें।
• खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।
§֍:4. बुवाई का समय और विधि§ֆ:• बुवाई का समय:
o खरीफ फसल के रूप में मई-जून (दक्षिण भारत) और जून-जुलाई (उत्तर भारत) में बोया जाता है।
• बीज दर:
o संकर किस्में: 1.5-2 किग्रा/एकड़
o सामान्य किस्में: 4-5 किग्रा/एकड़
• बुवाई की विधि:
o लाइन से लाइन की दूरी: 60-90 सेमी
o पौधे से पौधे की दूरी: 30-45 सेमी
o बीज की गहराई: 4-5 सेमी
§֍:5. सिंचाई प्रबंधन§ֆ:• पहली सिंचाई बुवाई के 3-4 दिन बाद करें।
• फूल और रेशा बनते समय नमी की अधिक आवश्यकता होती है।
• कुल 6-8 सिंचाई (गर्मी में अधिक, बारिश के मौसम में कम)।
§֍:6. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन§ֆ:• गोबर की खाद: 8-10 टन/एकड़
• रासायनिक खाद (NPK):
o नाइट्रोजन (N): 50-60 किग्रा/एकड़
o फॉस्फोरस (P): 25-30 किग्रा/एकड़
o पोटाश (K): 25-30 किग्रा/एकड़
• खाद को बुवाई के समय और फूल आने से पहले दें।
§֍:7. खरपतवार नियंत्रण§ֆ:• निराई-गुड़ाई: बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई करें।
• हर्बिसाइड्स:
o पेंडीमेथालिन (बुवाई के तुरंत बाद)
o ग्लाइफोसेट (यदि खरपतवार अधिक हो)।
§֍:8. प्रमुख कीट एवं रोग प्रबंधन§ֆ:कीट:
• चूसक कीट: सफेद मक्खी, थ्रिप्स, एफिड्स
o उपचार: इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का छिड़काव।
• रेशा नुकसान करने वाले कीट: गुलाबी सुंडी, अमेरिकन सुंडी
o उपचार: Bt कपास या कीटनाशक जैसे स्पिनोसेड।
रोग:
• पत्ती मरोड़ रोग (Leaf Curl Virus): सफेद मक्खी द्वारा फैलता है।
o रोकथाम: रोगरोधी किस्में, कीटनाशक।
• बैक्टीरियल ब्लाइट:
o उपचार: स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का छिड़काव।
§֍:9. कटाई और उपज§ֆ:• कपास की फसल 120-180 दिन में तैयार हो जाती है।
• कटाई तब करें जब फटे हुए कोयले (बोल) सूख जाएं।
• औसत उपज:
o देसी कपास: 5-8 क्विंटल/एकड़
o संकर/Bt कपास: 10-15 क्विंटल/एकड़
§֍:10. कपास की खेती में किसान किन बातों का ध्यान रखें?§ֆ:• बीज चयन: उन्नत और प्रमाणित बीज (जैसे Bt कपास) का ही उपयोग करें।
• मिट्टी की जाँच: बुवाई से पहले मिट्टी की जाँच कर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।
• सिंचाई प्रबंधन: फूल और रेशा बनते समय पानी की कमी न होने दें।
• समय पर कीट नियंत्रण: सफेद मक्खी और सुंडी पर नियंत्रण जरूरी है।
• फसल चक्र अपनाएँ: लगातार कपास न बोएं, गेहूं या दलहनी फसलों के साथ चक्र अपनाएँ।
• बाजार की जानकारी: कपास का बाजार भाव जानकर ही भंडारण या बिक्री करें।
§कपास (कॉटन) की खेती एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, जो मुख्य रूप से रेशे (फाइबर) और बीज (तेल व खल के लिए) के लिए उगाई जाती है। यह भारत में प्रमुख व्यावसायिक फसलों में से एक है और कपड़ा उद्योग का आधार है। यहां कपास की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है:

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