֍:खराब होती है मिट्टी की गुणवत्ता§ֆ:खेत में पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. इसी के साथ खेत की नमी भी खत्म हो जाती है. किसानों में पराली प्रबंधन के प्रति जागरूकता अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची है, जिससे इस समस्या का समाधान हो सके. लेकिन अब इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने कंबाइन मशीनों में सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का उपयोग अनिवार्य कर दिया है. यह प्रणाली पराली का प्रबंधन करने में सहायक है और इससे पराली को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती. §֍:इन यंत्रो का करें इस्तेमाल§ֆ:किसान धान की कटाई समान्य कंबाइन हार्वेस्टर से करते हैं, जिससे फसल का ऊपरी हिस्सा कटता है और बाकी भारी मात्रा में पराली का रूप लेकर खेत में ही रह जाती है. रबी के सीजन में गेहूं की बुवाई के लिए समय से खेत तैयार करने के लिए किसान पराली को जला देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों का नुकसान होता है. इस समस्या से निपटने के लिए अब कंबाइन हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) जोड़ा जाता है, जो पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिला देता है.§֍:पंजाब में लगता है जुर्माना§ֆ:एसएमएस वाली कंबाइनों से कटी फसल वाले खेतों में हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और जीरो टिल सीड ड्रिल जैसी मशीनों से सीधी बुवाई संभव होती है, जिससे किसानों को रबी फसलों की समय से बुवाई और पैसे की बचत होती है. कंबाइन मशीन में एसएमएस को जोड़ना कई राज्यों में अनिवार्य कर दिया गया है और अगर कंबाइन मशीन में एसएमएस सिस्टम नहीं जोड़ा गया, तो कंबाइन मालिक को पंजाब सहित कई राज्यों में सजा और जुर्माने का प्रावधान है.§֍:बुवाई के लिए इस्तेमाल करें हैप्पीसीडर§ֆ:अधिक पराली वाले खेत में बुवाई के लिए हैप्पी सीडर मशीन से गेहूं की बुवाई करने पर सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है, क्योंकि धान की फसल के अवशेषों से खेत में नमी बनी रहती है. इससे पानी की बचत होती है और पराली मिट्टी में मिलकर जैविक खाद का काम करती है. हैप्पी सीडर मशीन को 45 से 50 हॉर्सपावर वाले ट्रैक्टर के साथ जोड़कर एक दिन में 6 से 7 एकड़ खेत की बुवाई की जा सकती है. इस विधि से फसलों की उपज भी बढ़ती है और खरपतवार की समस्या भी कम होती है.§֍:§अक्टूबर में धान की कटाई शुरु हो जाती है. इसी दौरान गेहूं की बुवाई भी होती है. कटाई के दौरान कई किसान खेतों में कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग करते हैं, जिससे खेत में पराली बच जाती है. इसे वे जल्द बुवाई करने के लिए जला देते हैं. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई गंभीर हालातों में पहुंच जाता है. इसके अलावा पराली जलाने से मिट्टी में रहने वाले लाभकारी कीट भी नष्ट हो जाते हैं.

