मध्य प्रदेश के हरदा जिले के किसान यूरिया खाद (Urea Fertilizer) की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। डेढ़ से दो महीने पुरानी खड़ी फसलों को समय पर खाद न मिलने से उत्पादन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। किसानों ने बताया कि वे रात-रातभर एमपी एग्रो के गोदामों के बाहर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, लेकिन अभी तक उनकी जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिल पाई है।
जानें क्या है समस्या?
हरदा जिले में इस साल मक्का और सोयाबीन की खेती का रकबा बढ़ा है, लेकिन खाद की आपूर्ति ठप्प होने से फसलों का विकास रुक गया है। किसान भीमराज गौर ने बताया, “प्रति हेक्टेयर जितनी यूरिया खाद चाहिए, वह नहीं मिल पा रही। फसल पीली पड़ने लगी है, उत्पादन आधा रह जाएगा।” 513
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले को इस सीजन में 25,000 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है, लेकिन अभी तक केवल 22,000 मीट्रिक टन ही आपूर्ति हो पाई है। कृषि उपसंचालक जवाहरलाल कास्दे ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि “शीघ्र ही शेष खाद की व्यवस्था की जाएगी,” लेकिन किसानों को अभी तक कोई राहत नहीं मिली है।
किसानों की मजबूरी
बूंददा गाँव के किसान सुभाष ने बताया, “20 बोरी खाद के लिए मैं 6 घंटे से लाइन में खड़ा हूँ। कर्मचारी कहते हैं कि 8 घंटे और इंतजार करना पड़ेगा।” झालवा के प्रमोद ने कहा कि रात में लाइन लगाने का एकमात्र फायदा यह है कि सुबह थोड़ी खाद मिल जाती है, लेकिन यह भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।
पृष्ठभूमि और बड़ी चुनौतियाँ
हरदा जिला पहले से ही कृषि संकटों से जूझ रहा है। पिछले सालों में यहाँ मॉनसून की अनिश्चितता, फसल बीमा योजनाओं में धांधली 7, और व्यापारियों द्वारा किसानों के साथ धोखाधड़ी 412 जैसी घटनाएं सामने आई हैं। अब यूरिया की कमी ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
किसानों की आर्थिक स्थिति होगी खराब
किसान संगठनों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेत की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही खाद नहीं मिली, तो मक्का और सोयाबीन की फसलों को भारी नुकसान होगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।
यह खबर हरदा जिले के किसानों की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क करें।

