֍:किसान रखें इन बातों का ख्याल §֍:§ֆ:पिछले कुछ वर्षों में बकानी रोग के कारण इसकी उत्पादकता में कमी आई है. इस रोग के कारण धान की पैदावार में 15 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. बासमती की किस्में, जैसे पूसा बासमती-1509 और पूसा बासमती-1121, में इस रोग का ज्यादा प्रकोप देखा जाता है. इसलिए जो किसान धान की खेती करने जा रहे हैं, वे इस रोग से बचने के लिए पहले से ही सजग रहें, वरना ये रोग बहुत ज्यादा नुकसान कर सकता है.
§֍:बकानी रोग की पहचान कैसे करें? §ֆ:कृषि विज्ञान केन्द्र, गौतमबुद्ध नगर के हेड और पौध सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ मंयक कमार राय के अनुसार धान की फसल में बकानी यानी झंडा रोग फ्यूजेरियम मोनिलिफोर्मे नामक कवक के कारण होता है. इस बीमारी में रोगग्रस्त पौधे स्वस्थ पौधों से असामान्य रूप से लंबे हो जाते हैं और कुछ पौधों में बिना लंबाई बढ़े ही तना और पत्तियां गलने लगती हैं. ऐसे पौधे ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहते और जल्द ही सूख जाते हैं. रोपाई के बाद ये पौधे पीले, पतले और लंबे हो जाते हैं और रोगी पौधों में कल्ले कम निकलते हैं. पौधे जल्द ही सूख जाते हैं. इस रोग से प्रभावित पौधे बच जाते हैं तो उनमें बालियां और दाने नहीं निकलते. जब नमी वाला वातावरण होता है तो तनों के निचले भाग पर सफेद से लेकर गुलाबी रंग का फंगस दिखाई देता है, जो धीरे-धीरे ऊपर बढ़ता जाता है. रोगग्रस्त पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और उनमें दुर्गंध आती है.
§पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में बकानी यानी झंडा रोग किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. खासकर बासमती धान में. यह एक ऐसा रोग है जिसमें ज्यादा तापमान में फंगस अधिक बढ़ता है, जिससे बीमारी अधिक फैलती है और फसलों की पैदावार प्रभावित होती है. ऐसे में किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. साल 2019 में इस रोग का प्रकोप बहुत ज्यादा देखा गया था, जिससे किसानों को बहुत अधिक नुकसान हुआ था. इस बीमारी का असर धान की नर्सरी से ही शुरू हो जाता है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बीमारी प्री-मॉनसून की बारिश न होने के कारण भी होती है.

