ֆ:राव ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान भी यह वादा किया गया था कि एमएसपी को लेकर एक समिति गठित की जाएगी, लेकिन वह आज तक नहीं बनी। इसके विपरीत, सरकार बिना किसान संगठनों की सलाह के मनमाने ढंग से एमएसपी की घोषणा कर रही है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है।उन्होंने आंध्र प्रदेश की एनडीए सरकार को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि राज्य सरकार केवल उद्योगों को लुभाने पर ध्यान दे रही है, जबकि प्रदेश की 62% आबादी खेती पर निर्भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में फिलहाल किसी भी फसल को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। वहीं, तेलंगाना में ए ग्रेड चावल पर ₹500 प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़, कर्नाटक, झारखंड, केरल और ओडिशा जैसे राज्य भी किसानों को बोनस दे रहे हैं, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया।§ֆ:आंध्र प्रदेश रैयतू संघ के राज्य महासचिव के.वी.वी. प्रसाद ने धान के एमएसपी में केवल ₹69 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को ‘न्याय की उपेक्षा’ बताया और मांग की कि एमएसपी को ₹3,135 प्रति क्विंटल किया जाए, जो कि सी2 लागत से 50% अधिक है।अन्य किसान नेता जैसे कि वाई. केशव राव, सिंहाद्री झांसी (एपी कृषि श्रमिक यूनियन), पी. जमलैया (आंध्र प्रदेश पट्टेदार किसान संघ) और डी. हरिनाथ (अखिल भारतीय किसान महासभा) ने भी इस मांग का समर्थन किया और सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की।§आंध्र प्रदेश किसान संघ समन्वय समिति के राज्य संयोजक एवं पूर्व मंत्री वड्डे शोभनाद्रीश्वर राव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करते समय सी2 + 50% फार्मूला (कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन की सिफारिश) को तत्काल लागू करे।रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को आज तक लागू नहीं किया। “सरकार ने सत्ता में आने से पहले किसानों से वादा किया था कि एमएसपी को उत्पादन लागत से 50% अधिक तय किया जाएगा, लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं किया गया है,” उन्होंने आरोप लगाया।

