ֆ:मंडी के सुंदरनगर और चौहारघाटी क्षेत्र अदरक की खेती के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। यहां हर साल लगभग 200 क्विंटल बीज की मांग रहती है। आमतौर पर अप्रैल से मई की शुरुआत तक अदरक की बुआई की जाती है, लेकिन इस बार विभाग के बीज केंद्रों पर अदरक का बीज नहीं पहुंच पाया। अब जबकि बिजाई का अंतिम समय आ गया है, किसान किसी भी कीमत पर बीज जुटाने की कोशिश में लगे हैं।
§ֆ:हिमाचल में अदरक का सबसे बड़ा उत्पादन सिरमौर जिले में होता है, और हर साल कृषि विभाग यहीं से बीज खरीदकर राज्य के अन्य जिलों तक पहुंचाता है। लेकिन इस बार सिरमौर के किसानों ने विभाग को बीज बेचना उचित नहीं समझा। खुले बाजार में बेहतर दाम मिलने के कारण किसानों ने अपनी फसल सीधे मंडियों में बेच दी। नतीजतन विभाग बीज की खरीद ही नहीं कर सका और मंडी जैसे जिलों में उसकी आपूर्ति ठप हो गई।
§ֆ:विभाग की ओर से मक्का और अन्य फसलों पर तो सब्सिडी दी गई, लेकिन अदरक के लिए न तो बीज उपलब्ध हुआ और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था। किसान समय और लागत—दोनों में नुकसान झेल रहे हैं। कुछ किसानों ने निजी स्रोतों से बीज जुटाया है, लेकिन कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं, जिससे लागत में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
§ֆ:विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 8-10 दिनों तक अदरक की बिजाई संभव है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे वैकल्पिक स्रोतों से बीज लाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि किसानों को खुद ही अपनी व्यवस्था करनी पड़ रही है।
§इस बार मंडी जिले के अदरक उत्पादक किसानों को सरकार की तरफ से झटका लगा है। कृषि विभाग अदरक के बीज की आपूर्ति करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिससे किसान अब खुद ही बाजार से महंगे दामों पर बीज खरीदने को मजबूर हैं। अदरक की बिजाई का समय तेजी से खत्म हो रहा है, ऐसे में विभाग की यह नाकामी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

