ֆ:कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर में आप कब से कार्यरत है ? §ֆ:मै किसान भाईयों को बताना चाहूँगा कि कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर वर्ष 1992 में स्थापित किया गया था. वर्ष 2011 से मै इस कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत हूं. लगभग 13 वर्षो से मैं इस कृषि विज्ञान केंद्र से जुडा हुआ हूँ. तभी से यहाँ पर रहते हुए किसानों की सेवा कर रहा हूं.
§ֆ:किसानों की समस्याओं का कृषि विज्ञान केंद्र कैसे निराकरण कर रहा है ?
§ֆ:खेती मामले में यह क्षेत्र काफी एडवांस हैं, जहाँ तक यहाँ की जलवायु परिस्थितियों का सवाल है तो वह भी खेती के अनुकूल है. किसानों की समस्याओं की बात करें तो प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र का कार्य जो कृषि तकनीक किसी संस्थान से निकलती है उसका क्षेत्रीय स्तर पर परिक्षण किया जाता है. जिससे कि यह ज्ञात किया जा सके वह तकनीक उस क्षेत्र के अनुकूल है या नही है. जब किसानों के प्रक्षेत्रों पर हम उस तकनीक का परिक्षण करके आश्वस्त हो जाते हैं तो तब हम उस तकनीक का किसानों तक प्रसार करते हैं. इस प्रकार से हम किसानों को कृषि सम्बंधित तकनीक उपलब्ध कराकर उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं.
§ֆ:
इस क्षेत्र में मुख्य रूप से किन फसलों पर अधिक ध्यान दिया जाता है ?
§ֆ:इस क्षेत्र में शुरुआत से ही गन्ना और गेहूं जैसी मुख्य फसलों की खेती की जाती है. इसी के साथ यहाँ पर कुछ क्षेत्र में धान की खेती भी की जाती है. यहाँ पर लगभग 132000 हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जाती है करीब 75000 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है. यहाँ पर पिछले 4 से 5 वर्षों में गन्ने की उत्पादकता काफी बढ़ी है. इसमें एक बड़ा बदलाव आया है. हम किसानों के साथ गन्ने की तकनीक को लेकर बात करते हैं, उसकी वैरायटी को लेकर बात करते हैं.जैसे अभी तक यहाँ पर 0238 गन्ने की वैरायटी काफी चल रही थी. अब इसमें बीमारी आने की वजह से इसके रिप्लेसमेंट की बात हो रही है. इसके अलावा यहाँ के किसानों को ट्रेंच विधि द्वारा गन्ने की बुवाई के बारें में जागरूक किया जा रहा है. इसी के साथ यहाँ पर किसानों को इंटरक्रोपिंग के बारें में भी बताया जा रहा है. ताकि किसान अच्छी फसल ले सके. बर्ड प्लांटिंग से भी हम किसानों अवगत कराते हैं. इन सबके अलावा अपनी गोष्ठियों के माध्यम से किसानों हम पूरी तकनिकी जानकारी उपलब्ध कराते हैं.
§ֆ:अन्य फसलों के बारे में आप किसानों को कैसे जागरुक करते हैं ?
§ֆ:जैसा कि मैंने पहले बताया यहाँ पर गेहूं और गन्ना दो मुख्य फसलें हैं. इसमें गन्ने के अलावा किसानों को गेहूं की फसल के बारें में भी जानकारी देते हैं. इस क्षेत्र में गेहूं की बुवाई दो तरीके से होती है. एक अगेती बुवाई होती है और पछेती बुवाई होती है. यहाँ पर गेहूं की पछेती बुवाई इसलिए होती है क्योंकि यहाँ पर जो गन्ने की बेल्ट है उसमें गन्ने की कटाई के बाद ही गेहूं की बुवाई होती है. तो हमारा प्रयास यही है कि हम किसानों को बताए की अगेती बुवाई में उनको कौन सी किस्म की बुवाई करनी है और पछेती बुवाई में कौन सी वैरायटी बोई जाती है. इसके अलावा आजकल नई नई किस्में आ रही जिनको हम अपने परिक्षण में लेते हैं. फिर उसको किसानों तक पहुंचाते हैं.
§ֆ:संतुलित उर्वरक एवं कीटनाशकों के उपयोग के बारे में किसानों को कैसे जागरूक करते है ?
§ֆ:कृषि विज्ञान केंद्र हमेशा किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों और कीटनाशको के उपयोग के बारे में जागरूक करता है. हम इसको ऐसे कह सकते हैं कि किसान कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग मौजूदा समय में असंतुलित तरीके से कर रहे हैं. हम किसानों को यह अवश्य बताते हैं कि उनको किस फसल में कितने उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करना है. हम उनको यह भी बताते हैं कि उनको फसल में किस स्टेज पर कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग करना हैं. बहुत से कीटनाशक बाजार में नए आते हैं कुछ कीटनाशक बैन भी हो चुके हैं. हम उन कीटनाशकों को उपयोग करने के लिए किसानों को मना करते हैं. साथ ही गोष्ठियों, किसान मेला आदि के माध्यम से किसानों को जागरूक करते हैं.
§ֆ:आप किसानो को क्या कहना चाहेंगे ?
§ֆ:जो किसान भाई खेती कर रहे हैं वो इस बात का ध्यान ज़रुर रखे जो आप खेती कर रहे हैं उसको आप तकनीक के माध्यम से करें देखा देखी न करे. इससे नुकसान हो सकता है. समय बदल रहा है हर एक चीज में परिवर्तन आ रहा है. खेती में भी परिवर्तन आ रहा है उसी के अनुरूप किसान खेती में नयी नयी तकनीक अपनाकर खेती करें. इसी के साथ कृषि विज्ञान केंद्र और वैज्ञानिकों के संपर्क में रहे और जागरूक बनें .
§किसानों तक अत्याधुनिक कृषि तकनीक को पहुँचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र हमेशा मुख्य केंद्र बिंदु रहे हैं. क्षेत्रीय स्तर पर किसानों को कृषि की नई-नई तकनीकों से जोड़ने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिक अपना कार्य बखूबी निभा रहे हैं. इसी कड़ी में फसल क्रांति की टीम कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर में पहुंची जहाँ पर फसल क्रांति की टीम ने यहाँ के प्रभारी डॉ. ओमवीर सिंह से कई विषयों पर बात की पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश.

