जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में किसानों की मक्का की फसल पर फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm) का भयानक हमला हुआ है। मानसर पंचायत के खेतों में यह कीट इस कदर फैल चुका है कि कई किसानों की फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं। स्थानीय कृषकों ने भारी नुकसान की बात कही है और जल्द सहायता की मांग की है।
क्या है फॉल आर्मीवर्म?
इस खतरनाक कीट का वैज्ञानिक नाम Spodoptera frugiperda है। यह मुख्य रूप से मक्का पर हमला करता है, लेकिन गेहूं, ज्वार, बाजरा, गन्ना, कपास और सब्जियों समेत 80 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी तीव्र गति से फैलने और फसलों को चौपट कर देने की क्षमता इसे ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनाती है।
कैसे पहचानें इस विनाशकारी कीट को?
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लार्वा हरे, भूरे या हल्के गुलाबी रंग का होता है, पीठ पर तीन पीली धारियों के साथ।
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सिर पर ‘Y’ आकार का सफेद निशान इसकी खास पहचान है।
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पत्तियों पर गोल छेद और काले मल के धब्बे दिखाई देते हैं।
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मक्के के भुट्टों के अंदर तक पहुंचकर दानों को नुकसान पहुंचाता है।
फसल बचाने के उपाय:
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खेत की सफाई रखें ताकि कीट छिप न सके।
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यूरिया का संतुलित प्रयोग करें, अधिक न डालें।
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शुरुआती संक्रमण पर इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG की 80 ग्राम मात्रा को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़कें।
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ज्यादा प्रकोप होने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 9.3% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 4.6% ZC की 14 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ छिड़कें।
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दवा का छिड़काव केवल सुबह या शाम को ही करें, दोपहर में असर घट जाता है।
सरकार और कृषि विभाग से किसानों की अपील है कि वे जल्द से जल्द इस गंभीर कीट प्रकोप से निपटने के लिए राहत और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएं।

