֍:क्या हो सकता है खतरा?§ֆ:जल कानून से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि विचार यह था कि 15 जून से पहले रोपाई पर रोक लगाई जाए, क्योंकि नर्सरी में उगे गए धान को रोपाई के लिए तैयार होने में 30-35 दिन लगते हैं. पिछले कुछ सालों में अधिसूचना के माध्यम से रोपाई शुरुआत 25 जून तक भी टाल दी गई थी. ऐसे में सरकार का ये नया फैसला भूजल संरक्षण में एक महत्वपूर्ण झटका होगा. §֍:राज्य कृषि मंत्री ने कही ये बात§ֆ:पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियन ने कहा कि कानून में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है और यह अधिसूचना के जरिए किया जाएगा. किसानों द्वारा लंबी अवधि की धान की किस्मों (जो अधिक उपज देती हैं) के उपयोग और अधिक पानी का उपयोग करने की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के खेतों को केवल तीन महीने के लिए बिजली की आपूर्ति करेगी. इससे अधिक भूजल की खपत को रोकने में मदद मिलेगी. यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि पिछले अक्टूबर में नमी का स्तर मानक से अधिक होने के कारण कई किसानों को धान बेचने में कठिनाई हुई थी. वहीं, रोपाई की अवधि को आगे बढ़ाने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि खरीद के समय अनाज पर्याप्त रूप से सूखा हो.§֍:खेती में बढ़ावा§ֆ:पंजाब में 2019-20 से हर साल चावल का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि राज्य सरकार अपने किसानों को अलग-अलग फसलों की खेती के लिए राजी नहीं कर पाई है. वहीं, स्थानीय अधिकारी किसानों से गैर-बासमती से बासमती की ओर रुख करने को कह रहे हैं, जबकि दोनों ही चावल की फसलें हैं. 2019-20 में चावल का रकबा 29.20 लाख हेक्टेयर था, जो अगले साल 29.28 लाख हेक्टेयर, 2021-22 में 29.69 लाख हेक्टेयर, 2022-23 में 30.98 और 2023-24 में 31.79 लाख हेक्टेयर हो गया. साथ ही 2024-25 में यह बढ़कर 32.43 लाख हेक्टेयर हो गया.§पंजाब सरकार ने इस साल धान की रोपाई 1 जून से शुरु होने का फैसला लिया है. लेकिन इसमें कई समस्याएं कृषि विशेषज्ञों द्वारा देखी जा रही हैं. इसमें वे चिंतित हैं कि राज्य में भूजल का संकट तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में राज्य सरकार ने 2009 में एक कानून के माध्य से भूजल के उपयोग को नियंत्रित करना शुरु कर दिया था. जिसके तहत किसानों को 10 मई से पहले धान की नर्सरी उगाने पर रोक लगा दी गई थी, जबकि रोपाई की शुरुआत की तारीख सरकार को अधिसूचना के माध्यम से घोषित करने के लिए खुली छोड़ दी गई थी.

