֍:चीनी उत्पादन 1 मिलियन बढ़ने की संभावना §ֆ:सहकारी चीनी उद्योग निकाय (NFCSF) ने चालू सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान 29.15 मिलियन टन से बढ़ाकर 30.5 मिलियन टन कर दिया है. क्योंकि चालू सीजन का उत्पादन घाटा 31 दिसंबर तक 8 प्रतिशत से कम हो गया था, जबकि 15 दिसंबर तक यह घाटा 9 फीसदी से ज्यादा था. सहकारी निकाय ने इस रिकवरी में और बढ़ोत्तरी की उम्मीद जताई है. कहा है कि दिसंबर के आंकड़े सुधार के संकेत दिखा रहे हैं.
§֍:इथेनॉल मामले में ढील की मांग करेगा NFCSF
§ֆ:बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार सहकारी निकाय (NFCSF) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने कहा कि सीजन की शुरुआत में अनुमानित 29 मिलियन टन चीनी उत्पादन में लगभग 1.5 मिलियन टन की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन पर मौजूदा प्रतिबंधों में कुछ हद तक ढील दी जा सकती है. NFCSF भारतीय चीनी और जैव ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) के साथ मिलकर इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाएगा.
§֍:अक्टूबर-दिसंबर के बीच 511 कारखानों में पेराई हुई §ֆ:सहकारी चीनी निकाय के आंकड़ों के अनुसार 2023-24 सीजन में अक्टूबर और दिसंबर के बीच 511 कारखानों ने 122.26 मिलियन टन गन्ने की पेराई की है और 9.17 प्रतिशत की औसत चीनी रिकवरी के साथ 11.21 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया है. एक साल पहले इसी अवधि में 514 मिलों ने 132.06 मिलियन टन गन्ने की पेराई की थी और 9.19 प्रतिशत की औसत चीनी रिकवरी के साथ 12.14 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया था.
§֍:राज्यवार चीनी उत्पादन अनुमान बढ़ाया §ֆ:सहकारी चीनी उद्योग निकाय के अनुसार उत्तर प्रदेश में 11.5 मिलियन टन उत्पादन होने का अनुमान है. पहले राज्य में 11 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था. वहीं, महाराष्ट्र में 8.5 मिलियन टन के पूर्व अनुमान को बढ़ाकर 9 मिलियन टन किया गया है. कर्नाटक में 3.8 मिलियन टन पूर्व अनुमान को बढ़ाकर 4.2 मिलियन टन कर दिया गया है. इसी तरह तमिलनाडु में 1.2 मिलियन टन और गुजरात में 1 मिलियन टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है जताई गई है. §अक्टूबर-दिसंबर सीजन के दौरान चीनी उत्पादन में 9 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन सहकारी चीनी इंडस्ट्री बॉडी नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री (NFCSF) ने वर्तमान सीजन में चीनी उत्पादन में सुधार की उम्मीद जताई है. सहकारी निकाय ने चालू सीजन में 30.5 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान जताया है. इससे किसानों को बेहतर कीमत हासिल हो सकेगी और चीनी की खुदरा कीमतों में नरमी रहेगी.

