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Home सफ़लता की कहानी

बिजली के निजीकरण के विरोध में बनारस के बिजली कर्मचारियों ने धरना दिया

Fiza by Fiza
December 13, 2024
in सफ़लता की कहानी
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बिजली के निजीकरण के विरोध में बनारस के बिजली कर्मचारियों ने धरना दिया
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ֆ:सभा को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने बताया कि उप्र और चंडीगढ़ में बिजली के निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी “निजीकरण विरोधी दिवस” मनाया गया और देशभर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभाएं की गई। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओ ई ई ई) ने चेतावनी दी है कि उप्र में निजीकरण के बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी होते ही देश भर में लाखों बिजली कर्मी सड़क पर उतरने को विवश होंगे। एन सी सी ओ ई ई ई ने निजीकरण को बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि अरबों खरबों रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी।

उप्र और चंडीगढ़ में बिजली के निजीकरण के विरोध में मुम्बई, कोलकाता,चेन्नई, बेंगलुरू, हैदराबाद, त्रिवेंद्रम, विजयवाड़ा, गुवाहाटी, नागपुर, रायपुर, जबलपुर, भोपाल, शिमला, जम्मू, श्रीनगर, देहरादून, चंडीगढ़, पटियाला, रांची, आदि स्थानों पर बड़े प्रदर्शन हुए। उप्र की राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों एवं परियोजनाओं पर विरोध सभाएं की गई।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि बिजली कर्मचारी और अभियंता माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बिजली व्यवस्था के सुधार में लगातार लगे हुए हैं और 15 दिसंबर से शुरू होने वाली ओ टी एस स्कीम को सफल बनाने में लगे हैं किंतु पता नहीं क्यों पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने अचानक प्रदेश के 42 जनपदों में बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा कर बिजली कर्मियों को उद्वेलित कर दिया है और अनावश्यक रूप से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। बिजली कर्मी अभी भी पूरी मेहनत से कार्य कर रहे हैं और निजीकरण के विरोध में सभी ध्यानाकर्षण कार्यक्रम कार्यालय समय के उपरांत कर रहे हैं जिससे बिजली व्यवस्था पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े और उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत ना हो।

संघर्ष समिति ने कहा कि आगरा के निजीकरण के पहले जारी किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट में ए टी एंड सी हानियां बहुत अधिक बढ़ाकर बताई गई थी जो फर्जी थी। इसी गलत डॉक्यूमेंट के चलते पॉवर कारपोरेशन को टोरेंट को बिजली देने मे ही 2434 करोड़ रु की चपत अब तक लग चुकी है। इस बार भी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किए बिना पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों की अरबों खरबों रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचने की साजिश है। बिडिंग के पहले यदि आर एफ पी डॉक्यूमेंट जारी किया जाए तो पूरा घोटाला सामने आ जाएगा।

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की अरबों रुपए की बेशक कीमती जमीन किस आधार पर मात्र एक रुपए में निजी घरानों को सौंप दी जाएंगी। यह जनता की परिसंपत्ति है। इन सब बातों से बिजली कर्मचारी और उपभोक्ता बहुत अधिक परेशान और उद्वेलित है।

दीक्षा छात्र संघ बि0 एच0यू से ध्रुव सहित कई साथियो ने बिजली के निजीकरण का विरोध एक गीत के माध्यम से किया और निजीकरण को पूर्णतः गलत ठहराते हुए इसकी निंदा किये।

सभा को सर्वश्री ई0 शैलेन्द्र दुबे ,ई0 अविनाश कुमार, ई0 आशीष कुमार, ई0 अमित धर्मा, मायाशंकर तिवारी,आर0बी0 यादव, अंकुर पाण्डेय, रामकुमार झा, मदन श्रीवास्तव, राजेन्द्र सिंह, ई0 नरेंद्र वर्मा , उदयभान दुबे, ध्रुव, आदि ने संबोधित किया।
§विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर समस्त ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने आज समस्त जिलो की भांति वाराणसी में भिखारीपुर स्थित हनुमानजी मंदिर पर भी विशाल सभा के माध्यम से निजीकरण विरोधी दिवस मनाया। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन कर्मचारियों को गुमराह कर रहा है और भय का वातावरण बनाकर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना रहा है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि प्रबंधन बिडिंग प्रक्रिया शुरू करने के पहले आर एफ पी डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी करे तो निजीकरण के खतरों का अपने आप खुलासा हो जाएगा।

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