भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि जैसे-जैसे भारत विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे शिक्षा को राष्ट्र की प्राथमिकता बनाना और भी जरूरी हो गया है। वह आज ‘भारत में स्कूली शिक्षा: सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण और समान अवसरों की ओर’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट द्वारा किया गया था।
मंत्री ने कहा कि भारत की मौजूदा $4 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था को 2047 तक $35 ट्रिलियन तक पहुंचाने के लिए एक शिक्षित, जिम्मेदार और उत्पादक नागरिक वर्ग तैयार करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सार्वभौमिक, समावेशी और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को अनिवार्य बताया।
शिक्षा के अधिकार से शुरू हुई नई क्रांति
पुरी ने 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पारित 86वें संविधान संशोधन का उल्लेख किया, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। इसके बाद 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू किया गया, जिससे देश में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव आए।
मोदी सरकार के दौरान शिक्षा में सुधारों की रफ्तार तेज
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र में कई प्रभावी योजनाओं और मिशनों के जरिए सुधारों को गति मिली है। उन्होंने UDISE और ASER रिपोर्ट्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि:
- युवा साक्षरता दर 97% तक पहुंच गई है।
- लिंग साक्षरता अंतर में बड़ी कमी आई है, जो ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और स्वच्छ भारत अभियान जैसी पहलों का परिणाम है।
- प्राथमिक स्तर पर नामांकन दर 84% से बढ़कर 96% और उच्च प्राथमिक स्तर पर 62% से बढ़कर 90% हो गई है।
- अध्यापक-छात्र अनुपात 42:1 से घटकर 24:1 हो गया है।
- लड़कियों के लिए अलग शौचालयों वाली स्कूलों की संख्या 30% से बढ़कर 91% हो गई है।
- बिजली से युक्त स्कूलों की संख्या 20% से बढ़कर 86% तक पहुंची है।
- ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट आई है—यह 1% से घटकर 1.5% रह गई है।
स्वतंत्रता के समय 17% थी साक्षरता, आज लगभग 80%
पुरी ने बताया कि स्वतंत्रता के समय देश की साक्षरता दर केवल 17% थी, जबकि अब यह लगभग 80% हो चुकी है। उन्होंने इसे आमजन की शिक्षा के लिए निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया और कहा कि अब समय आ गया है कि हम सार्वभौमिक शिक्षा की दिशा में निर्णायक कदम उठाएं।
शिक्षा को राजनीतिक से ऊपर रखने की अपील
उन्होंने कहा कि शिक्षा को राजनीतिक सीमाओं से परे रखकर राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना चाहिए, क्योंकि यह भारत के भविष्य को सीधे तौर पर आकार देती है। भले ही वे शिक्षा नीति विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन वे मानते हैं कि सशक्त और समावेशी शिक्षा प्रणाली ही भारत की जनसांख्यिकीय ऊर्जा को विकास में बदल सकती है।
प्रो. मुचकुंद दुबे के सम्मान में केंद्र की शुरुआत
इस कार्यक्रम में प्रो. मुचकुंद दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिनके सम्मान में ‘मुचकुंद दुबे सेंटर फॉर राइट टू एजुकेशन’ की स्थापना की गई है। पुरी ने इस केंद्र के पहले कार्यक्रम का उद्घाटन किया और प्रो. दुबे को एक प्रेरणास्रोत, कूटनीतिज्ञ और समाज सेवक बताते हुए उन्हें स्मरण किया।
इस अवसर पर देशभर के शिक्षा विशेषज्ञ, नीति निर्माता, और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

