֍:बिहार में बकरी पालन की मान्यता§ֆ:बिहार में बकरी पालन को एक विशेष दर्जा दिया गया है. इसे साधन के बिना भी पाला जा सकता है. आमतौर पर बेकार समझी जाने वाली चीजों को खाकर भी ये दूध और मांस उत्पादन करती हैं. उद्योग-धंधों के लिए बकरियों की खाल प्रयोग में लाई जाती है. वहीं, मांसाहारी लोगों को संतुलित और पौष्टिक आहार भी बकरी-पालन देता है.§֍:इन नस्लों से करें शुरुआत§ֆ:भारत में जमुनापरीत, बीटल, बरबरी, कच्छी, उस्मानावादी, ब्लैक बंगाल, सुरती, मालवारी और गुजराती आदि नस्लों की बकरियां अच्छी समझी जाती हैं. इनमें भरपूर मात्रा में दूध, मांस का उत्पादन हो जाता है. वहीं, खाद्य उत्पादन के लिए जमुनापरी, बीटल और बारबरी नस्ल की बकरियां काफी उपयोगी मानी जाती हैं. तीनों नस्लों में जमुनापरी नस्ल की बकरियों का विकास बिहार की जलवायु में होता है. यही कारण है कि बिहार में बकरी पालन करने के लिए जमुनापरी नस्ल की बकरियां ज्यादा अच्छी मानी गई हैं. §֍:टीकाकरण जरूरी§ֆ:पीपीआर रोग से अगर बकरी को बचाना चाहते हैं तो इसके लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है. पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार बकरी और भेड़ पालकों के लिए अच्छी पहल की है. बकरियों और भेड़ों को पीपीआर रोग से बचाने के लिए 25 फरवरी 2025 से मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है. टीकाकर्मियों द्वारा 4 माह से ऊपर के मेमनों, भेड़ों और बकरियों का पीपीआर से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है. §֍:इन बातों का रखें ध्यान §ֆ:- नवजात बच्चे के नाल पर रोज टिंचर आयोडिन लगाना होगा.
– नवजात बच्चे को दिन में तीन-चार बार दूध देना होगा.
– मां के दूध के अभाव में गाय का दूध भी पिलाया जा सकता है.
– दो-तीन हफ्ते के बाद बच्चे को मुलायम हरा चारा दिया जा सकता है.
– बकरियों की हीट चक्र 18-21 दिन और हीट अवधि 24-48 घंटे की होती है.
– हीट के लक्षण आने के 12 घंटे बाद इनका प्रजनन कराना चाहिए.
– तीन हफ्ते की आयु में नर बच्चे का बंध्याकरण करना चाहिए, इससे मांस की गुणवत्ता बढ़ जाती है और जो चमड़ा मिला है उसमें कोई दुर्गंध भी नहीं होती है.
– बकरियों में बच्चा पैदा होने के कुछ देर बाद जेर खुद की गिर जाता है.
– 8-10 घंटे तक जेर नहीं गिरता है तो पशु-चिकित्सक से सलाह लें.
– एक बच्चा से दूसरा बच्चा पैदा होने के बीच लगभग 15-20 मिनट का समय लगता है.
§अगर आप अतिरिक्त आय के लिए रास्ते खोज रहे हैं. तो बकरी पालन सही विकल्प होगा, क्योंकि इसमें कम लागत में अधिक मुनाफा हो जाता है. काफी समय से देखा जा रहा है कि किसानों का रुझान अतिरिक्त आय को लेकर पशु पालन की ओर बढ़ रहा है. ऐसे गाय-भैंस पालने की जगह बकरी पालन के क्षेत्र में बढ़ोतर देखी गई है. अपने देश में 50 से ज्यादा बकरियों की नस्लें पाई जाती है, जिससे किसान अधिक मुनाफा कर रहे हैं.

