֍:बाजार में है काफी डिमांड§ֆ:भारतीय मंडियों में चुकंदर की काफी डिमांड है. इसमें भारी मात्रा में पोषण होता है. साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए, विटामिन सी फोलिक एसिड, फाइबर, मैंगनीज और पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. ये सब्जी ब्लड प्रेशर और वजन कम करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में काफी मदद करती है. चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कैंसर जैसी घातक रोगों में काम आता है. यह हृदय रोग, खून की कमी आदि के रोगों में भी फायदेमंद है. §֍:कैसी हो मिट्टी?§ֆ:चुकंदर की खेती के लिए खेत में समतल एवं उपजाऊ बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है. इसी के साथ आप अन्य मिट्टी में भी इसकी खेती कर सकते हैं लेकिन मिट्टी का पीएच स्तर 6 से 7 के बीच होना चाहिए. चुकंदर की खेती के लिए ठंडी जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है.§֍:ऐसे करें खेत की तैयारी§ֆ:खेत में सबसे पहले गहरीज जुताई करनी होगी. बाद में खरपतवार नियंत्रण कर के खेत में गोबर की खाद डालकर खेत को तैयार कर, क्यारी बनाकर मेड़ पर चुकंदर की बुवाई करने से फसल काफी अच्छी हो जाती है. चुकंदर के बीजों को 2 सेंटीमीटर की गहराई में बोया जाना चाहिए. इससे फस की काफी अच्छी वृद्धि होती है.§֍:सिचांई§ֆ:चुकंगृदर की फसल में सिंचाई करने की जरूरत ज्यादा नहीं होती. इसमें बुवाई के 15 दिनों बाद पहली सिंचाई और बुआई के 20 दिनों बाद दूसरी सिंचाई की जाती है. इसके बाद 20 से 25 दिनों के बाद में सिंचाई होती है. किसान खरपतवार पर नियंत्रण के लिए 25 से 30 दिनों बाद निराई-गुड़ाई करें. §किसान परंपरागत खेती से हटकर अन्य फसलों की ओर जा रहा है. इससे समय के साथ खेती में काफी बचत होती है. साथ ही अच्छे उत्पादन के बाद कमाई भी काफी अच्छी हो जाती है, जिसमें नुकसान भी काफी कम ही होता है. ऐसे में सब्जियों की खेती कर किसान काफी अच्छी कमाई कर रहे हं. तो आइए बताते हैं आपको कि कैसे की जाती है बीटरूट या चुकंदर की खेती.

