देश की कृषि मंडियों को एकीकृत कर किसानों को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और तकनीक-सक्षम बाजार मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) योजना ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। अब तक देश की 1,522 कृषि मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है, जिससे 12.03 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उत्पादों और 49.14 करोड़ यूनिट गणनीय वस्तुओं (जैसे नारियल, पान, स्वीट कॉर्न, नींबू और बांस) का व्यापार संभव हो पाया है।
कुल मिलाकर अब तक इस पोर्टल पर ₹4,39,941 करोड़ मूल्य का व्यापार दर्ज किया गया है, जो डिजिटल कृषि बाजार की ताकत और किसानों में इसके प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
किसानों के लिए सुलभ और सशक्त प्लेटफॉर्म
ई-नाम को वेब और मोबाइल एप दोनों माध्यमों से सुलभ बनाया गया है, जिससे देश के छोटे और सीमांत किसान भी इसकी सेवाओं का लाभ उठा सकें। अब तक 1.79 करोड़ से अधिक किसान और 4,518 किसान उत्पादक संगठन (FPO) इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
ई-नाम को लोकप्रिय बनाने और किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम, सोशल मीडिया ट्यूटोरियल्स, और टोल-फ्री हेल्पलाइन (18002700224) जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।
महाराष्ट्र और हिंगोली की विशेष भागीदारी
महाराष्ट्र में 12.41 लाख किसान और 354 एफपीओ ई-नाम से पंजीकृत हैं। हिंगोली ज़िले की बसमत, हिंगोली और सेनगांव मंडियाँ भी ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं, जहाँ 28,197 किसानों में से 10,437 किसान पहले ही इस डिजिटल मंच पर व्यापार कर चुके हैं।
राज्यों का सक्रिय योगदान और अंतर-राज्यीय व्यापार
कृषि विपणन राज्य का विषय होने के कारण ई-नाम को सफल बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका भी अहम रही है। कुछ राज्यों ने लाइसेंसिंग मानदंडों को उदार बनाकर और पंजीकृत खरीदारों को बोली लगाने की अनुमति देकर अंतर-राज्यीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया है। पिछले तीन वर्षों में ₹67,297 करोड़ का अंतर-राज्यीय व्यापार दर्ज किया गया है।
अधिसूचित वस्तुओं की सूची में विस्तार
वर्तमान में ई-नाम पर 238 वस्तुएँ अधिसूचित हैं, जिनकी ऑनलाइन नीलामी की जा सकती है। राज्यों से लगातार नई वस्तुओं को जोड़ने के अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं, जिन्हें विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (DMI) द्वारा जांच कर उचित समावेशन किया जा रहा है।
ई-नाम: डिजिटल क्रांति के जरिए कृषि व्यापार में पारदर्शिता और लाभ
ई-नाम न केवल कृषि विपणन में पारदर्शिता लाने वाला एक डिजिटल माध्यम है, बल्कि यह किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाकर सीधा बाजार से जोड़ने में भी सफल रहा है। इसके माध्यम से समान अवसर, बेहतर दाम और समय की बचत सुनिश्चित हुई है।
केंद्र सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में ई-नाम से और अधिक मंडियों को जोड़ना, वस्तुओं की सूची को विस्तारित करना और किसानों की भागीदारी को बढ़ावा देना है, जिससे यह मंच भारत के कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और समृद्धि का आधार बन सके।
देश की कृषि मंडियों को एकीकृत कर किसानों को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और तकनीक-सक्षम बाजार मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) योजना ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। अब तक देश की 1,522 कृषि मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है, जिससे 12.03 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उत्पादों और 49.14 करोड़ यूनिट गणनीय वस्तुओं (जैसे नारियल, पान, स्वीट कॉर्न, नींबू और बांस) का व्यापार संभव हो पाया है।
कुल मिलाकर अब तक इस पोर्टल पर ₹4,39,941 करोड़ मूल्य का व्यापार दर्ज किया गया है, जो डिजिटल कृषि बाजार की ताकत और किसानों में इसके प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
किसानों के लिए सुलभ और सशक्त प्लेटफॉर्म
ई-नाम को वेब और मोबाइल एप दोनों माध्यमों से सुलभ बनाया गया है, जिससे देश के छोटे और सीमांत किसान भी इसकी सेवाओं का लाभ उठा सकें। अब तक 1.79 करोड़ से अधिक किसान और 4,518 किसान उत्पादक संगठन (FPO) इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
ई-नाम को लोकप्रिय बनाने और किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम, सोशल मीडिया ट्यूटोरियल्स, और टोल-फ्री हेल्पलाइन (18002700224) जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।
महाराष्ट्र और हिंगोली की विशेष भागीदारी
महाराष्ट्र में 12.41 लाख किसान और 354 एफपीओ ई-नाम से पंजीकृत हैं। हिंगोली ज़िले की बसमत, हिंगोली और सेनगांव मंडियाँ भी ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं, जहाँ 28,197 किसानों में से 10,437 किसान पहले ही इस डिजिटल मंच पर व्यापार कर चुके हैं।
राज्यों का सक्रिय योगदान और अंतर-राज्यीय व्यापार
कृषि विपणन राज्य का विषय होने के कारण ई-नाम को सफल बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका भी अहम रही है। कुछ राज्यों ने लाइसेंसिंग मानदंडों को उदार बनाकर और पंजीकृत खरीदारों को बोली लगाने की अनुमति देकर अंतर-राज्यीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया है। पिछले तीन वर्षों में ₹67,297 करोड़ का अंतर-राज्यीय व्यापार दर्ज किया गया है।
अधिसूचित वस्तुओं की सूची में विस्तार
वर्तमान में ई-नाम पर 238 वस्तुएँ अधिसूचित हैं, जिनकी ऑनलाइन नीलामी की जा सकती है। राज्यों से लगातार नई वस्तुओं को जोड़ने के अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं, जिन्हें विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (DMI) द्वारा जांच कर उचित समावेशन किया जा रहा है।
ई-नाम: डिजिटल क्रांति के जरिए कृषि व्यापार में पारदर्शिता और लाभ
ई-नाम न केवल कृषि विपणन में पारदर्शिता लाने वाला एक डिजिटल माध्यम है, बल्कि यह किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाकर सीधा बाजार से जोड़ने में भी सफल रहा है। इसके माध्यम से समान अवसर, बेहतर दाम और समय की बचत सुनिश्चित हुई है।
केंद्र सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में ई-नाम से और अधिक मंडियों को जोड़ना, वस्तुओं की सूची को विस्तारित करना और किसानों की भागीदारी को बढ़ावा देना है, जिससे यह मंच भारत के कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और समृद्धि का आधार बन सके।

