ֆ:देश में जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. मंडाविया ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को मजबूत बनाने एवं प्रस्तुत किए गए उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार करने के अतिरिक्त नियमित आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क बनाए रखने के के साथ-साथ कड़ी गुणवत्ता जांच और नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए बहुत प्रयास किए गए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सरकार ने इन जन औषधि केंद्रों के व्यक्तिगत संचालकों को वित्तीय सहायता प्रदान की, जिसमें दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित संचालकों को अतिरिक्त सहायता भी शामिल है ताकि उन्हें ये केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे छोटे उद्यमियों को वित्तीय स्वायत्तता मिलने के साथ ही साथ ही देश भर में जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क और पहुंच मजबूत हुई है।
§ֆ:सिडबी और पीएमबीआई के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “यह एमओयू जन औषधि केंद्रों के छोटे और नए उद्यमियों के लिए एक आशीर्वाद के रूप में उभरेगा।” देश में जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को और बढ़ाने, उसे मजबूत करने और आधुनिक बनाने में इस एमओयू की क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मंत्रालय और सिडबी अधिकारियों से राज्यों और जमीनी स्तर पर लोगों को इस पहल के लाभों को उजागर करने का आग्रह किया ताकि इसके अधिकतम उपयोग के लाभ को सुनिश्चित किया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने इस ऋण सहायता कार्यक्रम को सफल बनाने में शामिल व्यक्तियों के साथ-साथ इस पहल के कुछ लाभार्थियों को भी सम्मानित किया।
§ֆ:भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी-एसआईडीबीआई) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री शिवसुब्रमण्यम रमन ने बताया कि ऋण सहायता कार्यक्रम छोटे व्यवसायों के लिए असुरक्षित कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करने के लिए जीएसटी और भारत के डिजिटल डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) दोनों का लाभ उठाता है। उन्होंने कहा कि “डीपीआई वर्तमान में पहचान आधार के माध्यम से पहचान और आधार से जुड़े यूपीआई के माध्यम से भुगतान की परतों पर आधारित है। आज हम उन करोड़ों छोटे व्यवसायों के लिए ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए अन्य दो परतों का उपयोग करते हुए एक तीसरी परत ‘क्रेडिट लेयर’ जोड़ रहे हैं, जो बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं और फिर साहूकारों द्वारा शोषण का शिकार बनते हैं।”
§केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने यहां जन औषधि केंद्रों के लिए एक ऋण सहायता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस संबंध में, उन्होंने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी-एसआईडीबीआई) और फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन के आदान-प्रदान की अध्यक्षता की। उन्होंने जन औषधि केंद्रों को ऋण सहायता के लिए एक वेबसाइट https://jak-prayaasloans.sidbi.in/home भी शुरू की । इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुएकि डॉ मंडाविया ने कहा, “जो औषधियां सस्ती और सुलभ हैं, वे किसी भी समाज के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इन्हें गरीबों के लिए ‘संजीवनी’ बताया है। 2014 में केवल 80 जन औषधि केंद्रों से आज देश भर में इनकी लगभग 11,000 इकाइयाँ संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “अनुमान है कि लगभग 10 से 12 लाख लोग हर दिन इन जन औषधि केंद्रों पर आते हैं, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण बचत और आवश्यक औषधियों तक पहुंच मिलती है।”

