वाराणसी: एस. राजलिंगम 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उन्होंने 24 अप्रैल, 2025 को कार्यभार संभाला था. इससे पहले, वह वाराणसी के जिलाधिकारी थे. परन्तु गत वर्ष देव दीपावली के संदर्भ में मंडल आयुक्त श्री कौशल लाल शर्मा जी के कार्य की सरहाना करते हुए आगामी देव दीपावली के दिन, दिनांक हेतु श्री देव दीपावली – आरती महासमिति का प्रस्ताव 20,अक्टूबर 2025 कार्तिक पूर्णिमा की तिथि, देव दीपावली महोत्सव हेतु जो शासन – प्रशासन को पूर्व में दिया था, वो स्वीकृत हो गया है।
वाराणसी में दीपावली का महत्व एवं सांस्कृतिक आयोजन सम्पूर्ण जगत को ज्ञात है, जिसे हम काशी के नाम से भी जानते है, भारत की सबसे पुरानी नगरी और आध्यात्मिक राजधानी है। यहाँ दीपावली का पर्व एक अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। दीपों के इस त्योहार पर पूरा शहर जगमगाता है, और गंगा घाटों पर लाखों दीप जलाकर माँ लक्ष्मी और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद माँगा जाता है। यहाँ सभी जाती व् धर्म के लोग दूर दूर से पूजा करने आते है तथा भगती में डूब कर आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करते है |
वाराणसी में दीपावली का महत्व
धार्मिक आस्था: काशी में दीपावली का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माँ पार्वती ने काशी में निवास किया था।
गंगा आरती एवं दीपदान: दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दीप जलाकर गंगा मैया की पूजा करते हैं।
मोक्ष की कामना: कहा जाता है कि दीपावली की रात काशी में दीपदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सांस्कृतिक आयोजन
दीपमालिका एवं रंगोली प्रतियोगिता: घाटों और गलियों में सुंदर दीपमालाएँ सजाई जाती हैं तथा रंगोली प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं।
भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम: विभिन्न मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों पर भजन, कीर्तन और शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम होते हैं।
आतिशबाजी एवं मेला: दीपावली की शाम को आकाशभर आतिशबाजियाँ छाई रहती हैं और शहर में मेले जैसा माहौल होता है।
आगामी दीपावली 2025 की तैयारियाँ
20 अक्टूबर 2025 को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व के लिए वाराणसीवासी पहले से ही तैयारियों में जुट गए हैं। घरों, मंदिरों और घाटों की सफाई, सजावट और दीपों की खरीदारी जोरों पर है। स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष प्रबंध कर रहा है ताकि सभी भक्तगण सुखद और सुरक्षित तरीके से दीपावली मना सकें।
आइए, इस दीपावली पर वाराणसी की पावन भूमि पर दीप जलाकर अपने जीवन को प्रकाशित करें!
शुभ दीपावली!

