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फल बाजारों में तुर्की सेबों की मांग में भारी गिरावट देखी जा रही है। थोक विक्रेताओं और आयातकों ने भी तुर्की से माल मंगवाने से इनकार कर दिया है। व्यापार मंडल का कहना है कि यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और देश की सेना के समर्थन में लिया गया है।
§֍:किसानों का विरोध, केंद्र से सख्त कदम की अपील§ֆ:हिल स्टेट हॉर्टिकल्चर फोरम और किसान संयुक्त मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा, “तुर्की की नीतियां भारत विरोधी हैं। ऐसे में वहां से बागवानी उत्पादों का आयात बंद करना राष्ट्रीय हित में होगा।” किसानों की मांग है कि सिर्फ सेब ही नहीं, बल्कि तुर्की से आने वाली चेरी और अन्य फल भी प्रतिबंधित किए जाएं।§֍:कृषि मंत्री से मुलाकात की तैयारी§ֆ:किसान संगठन के नेता शिवराज सिंह ने बताया कि वे जल्द ही केंद्रीय कृषि मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य मंत्री से मुलाकात कर तुर्की के फलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग रखेंगे। उनका कहना है कि यह कदम न केवल घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्पष्ट नीति भी दिखाएगा।
§֍:तुर्की सेब का बड़ा बाजार
§ֆ:वर्ष 2023-24 में भारत ने तुर्की से लगभग 1.6 लाख टन सेब का आयात किया था। भारत कुल 40 देशों से करीब 5 लाख टन सेब मंगवाता है, जिसमें तुर्की की हिस्सेदारी काफ़ी महत्वपूर्ण रही है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इस व्यापारिक साझेदारी पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
§भारत-पाकिस्तान संघर्ष में तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के बाद देशभर में विरोध की लहर दौड़ गई है। इसका असर अब सीधे व्यापार और कृषि क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों – हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड – के किसान संगठनों ने तुर्की से आयातित सेब और अन्य फलों पर प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की है।

