֍:16000 हेक्टेयर में होती है केले की खेती§ֆ:ICAR से संबद्ध कुशीनगर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अशोक राय के मुताबिक, यहां के किसान फल और सब्जी दोनों के लिए केले की फसल लेते हैं. इनके रकबे का अनुपात 70 और 30 फीसद का है. खाने के लिए सबसे पसंदीदा प्रजाति जी-9 और सब्जी के लिए रोबेस्टा है. जिले में लगभग 16 हजार हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है.§֍:योगी सरकार ने जारी किया ओडीओपी§ֆ:योगी सरकार द्वारा केले को कुशीनगर का एक जिला एक उत्पाद घोषित करने के बाद केले की खेती और प्रसंस्करण के जरिये सह उत्पाद बनाने का क्रेज बढ़ा है. कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं केले का जूस, चिप्स, आटा, अचार और इसके तने से रेशा निकालकर चटाई, डलिया एवम चप्पल आदि भी बना रहीं हैं. इनका खासा क्रेज और मांग भी है.§֍:दशहरा और छठ है केले के लिए मुख्य त्योहार§ֆ:हिंदू धर्म में कई ऐसे त्योहार शामिल हैं, जिसमें केले के फल से पूजा की जाती है. इसी के चलते नवरात्र के पहले से ही केले के भाव में बढ़ोतरी हो जाती है. मांग में भी इजाफा होता है.
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यूपी में परंपरागत खेती के साथ खई फलों और सब्जियों की खेती भी जाती है. इसी के चलते राज्य की विधानसभा कुशीनगर के केले की वाह-वाह दूर के राज्यों तक सुनाई दे रही है. दरअसल, कुशीनगर के केले की डिमांड त्योहारों के दिनों में बढ़ गई है. जिसके चलते दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, लुधियाना और भटिंडा तक केले का निर्यात किया जा रहा है. नेपाल और बिहार के भी लोग कुशीनगर के केले के मुरीद हैं.

