֍:ऑस्ट्रेलिया से आएंगी भेड़§ֆ:किसान तक की न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (SKUAST-K) के वाइस चांसलर नजीर अहमद गनई ने किसान तक को बताया कि ऑस्ट्रेलिया से डॉर्पर और टैक्सल भेड़ मंगाई जा रही हैं. इसके अलावा लोकल ब्रीड पर भी काम चल रहा है. जानकारों की मानें तो डॉर्पर भेड़ के मेमने चार महीने में ही 35 से 40 किलोग्राम वजन तक के हो जाते हैं. जबकि व्यस्क भेड़ का वजन 90 किलो तक हो जाता है. ज्यादा प्रजनन क्षमता के चलते भी डॉर्पर भेड़ को दुनियाभर में पसंद किया जाता है. डॉर्पर भेड़ को मौसम के हिसाब से जम्मू में रखा जाएगा. इस प्रजाति की भेड़ के सिर और पैर चिकने होते हैं. इसका कद छोटा, चेहरा चौड़ा, नाक काली और कान छोटे होते हैं. इस नस्ल की सबसे खास बात यह है कि इसकी मांसपेशियां अन्य भेड़ की तुलना में ज्यादा तेजी के साथ ग्रो करती हैं. §֍:क्यों जम्मू-कश्मीर में खाया जाता है भेड़ का मीट?§ֆ:शीप एक्सपर्ट और साइंटिस्ट डॉक्टर गौहर गुल शेख बताते हैं कि आज भेड़ के मीट की डिमांड कश्मीर ही नहीं साउथ इंडिया के कई राज्यों में भी है. भेड़ का मीट फैटी (चिकना) होता है इसलिए इसे और खासतौर पर पसंद किया जाता है. फैटी मीट की बिरयानी अच्छी बनती है. वहीं कश्मीर में ज्यादा खाए जानें की एक और बड़ी वजह ये कि ठंडा इलाका होने के चलते भेड़ का मीट ज्यादा एनर्जी देता है. देशभर में सबसे ज्यादा भेड़ का मीट कश्मीर में ही खाया जाता है. §जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा भेड़ पालन किय जाता है. यहां मीट की डिमांड अधिक है, जिसको पूरा करने के लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में भेड़ पालन किया जाता है. बावजूद इसके आज कश्मीर में भेड़ के मीट की 100 फीसद डिमांड पूरी कर पाना नामुमकिन सा हो गया है. डिमांड का 45 फीसद हिस्सा दूसरे राज्यों से मंगाया जा रहा है. राजस्थान समेत अन्य राज्यों से भेड़ों की खरीद की जाती है. रोजाना की मीट डिमांड के अलावा यहां बकरीद के मौके पर भेड़ों (नर) की ही कुर्बानी दी जाती है. राज्य की इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार ने एक योजना पर काम शुरू कर दिया है. इसके तहत ऑस्ट्रेलिया से उन्नत नस्ल की भेड़ खरीदी जा रही हैं. इस पर करीब 26 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा.

