पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD), मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के सहयोग से “वन हेल्थ कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी” पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन 20 जून 2025 को नई दिल्ली में किया। यह कार्यशाला “पशु स्वास्थ्य सुरक्षा सुदृढ़ीकरण परियोजना” के तहत आयोजित की गई, जो महामारी तैयारी और प्रतिक्रिया हेतु महामारी निधि (Pandemic Fund) द्वारा समर्थित है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य देश में पशु स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने और महामारी की रोकथाम की दिशा में प्रभावी, समन्वित और वैज्ञानिक संवाद रणनीति तैयार करना था। इसमें सरकारी विभागों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान निकायों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जनभागीदारी और स्थानीय संवाद पर जोर
कार्यशाला में यह बात सामने आई कि महामारी से निपटने और ज़ूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। वक्ताओं ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR), जैव सुरक्षा (biosecurity) और समुदाय-विशेष संवाद पर चर्चा की।
पशुपालन आयुक्त डॉ. अभिजीत मित्रा ने कहा कि कारगर संचार केवल जानकारी फैलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यवहार में बदलाव, विभिन्न क्षेत्रों के समन्वय और जोखिम को कम करने का सशक्त साधन भी है। उन्होंने जोर देकर कहा, “स्थानीय भाषा में सरल और स्पष्ट संदेशों से ही हम समुदायों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकते हैं।”
FAO की भूमिका और मीडिया की भागीदारी
FAOके सहायक प्रतिनिधि डॉ. कोंडा चाव्वा ने बताया कि संवाद ‘वन हेल्थ’ मॉडल की आधारशिला है। उन्होंने कहा, “संवाद ज्ञान और व्यवहार, नीति और अमल के बीच पुल का काम करता है। जब तक संवाद प्रभावी नहीं होगा, तब तक ज़मीनी स्तर पर बदलाव संभव नहीं है।”
कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण मीडिया पैनल चर्चा रही, जिसमें BBC न्यूज, ET Edge और डाउन टू अर्थ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। इस सत्र में मीडिया की भूमिका पर चर्चा हुई कि कैसे वह ‘वन हेल्थ‘ से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचा सकता है, गलत सूचनाओं को रोक सकता है और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर विश्वास कायम कर सकता है।
वन हेल्थ रणनीति दस्तावेज और तकनीकी अभ्यास
कार्यशाला में वन हेल्थ रणनीति दस्तावेज की भी चर्चा की गई, जो वर्तमान में तैयार किया जा रहा है। यह दस्तावेज पशु, मानव और पर्यावरण स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक राष्ट्रीय मार्गदर्शक दस्तावेज होगा। प्रतिभागियों ने जोखिम संचार, संदेश निर्माण और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय पर तकनीकी सत्रों व समूह अभ्यासों में भी भाग लिया।
भारत की प्रतिबद्धता
भारत सरकार ने महामारी के जोखिम को कम करने, निगरानी तंत्र को मजबूत करने, फील्ड स्तर की क्षमताओं को सशक्त बनाने और जनभागीदारी के माध्यम से समन्वित संवाद व्यवस्था विकसित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

