भारतीय किसानों की मेहनत और लगन के दम पर खेती में कई बदलाव आ रहे हैं, और इस बदलाव को और रफ्तार दी है क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के PROAGRO हाइब्रिड सरसों बीजों ने। जहां एक ओर खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं उच्च गुणवत्ता वाले बीज किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं।
राजस्थान के किसान की बदली किस्मत: PROAGRO 5232 बना वरदान
राजस्थान के भरतपुर जिले के डोडा गांव निवासी श्यामवीर के लिए सरसों की खेती कोई नई बात नहीं थी, लेकिन हर सीजन में उन्हें कम उपज, कीटों का हमला और मौसम की मार से निराशा ही हाथ लगती थी। लेकिन दो साल पहले जब उन्होंने PROAGRO 5232 हाइब्रिड बीज अपनाया, तो न सिर्फ उनकी उपज में भारी वृद्धि हुई, बल्कि तेल प्रतिशत भी 41–43% तक रहा।
श्यामवीर गर्व से कहते हैं, “PROAGRO 5232 ने हमें वह सब कुछ दिया जिसकी हमें वर्षों से तलाश थी अच्छी उपज, रोग प्रतिरोधक क्षमता और सिर्फ 125–130 दिनों में फसल की परिपक्वता। अब गांव के अन्य किसान भी इसे तेजी से अपना रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अब वे PROAGRO 5232 के साथ कंपनी का नया हाइब्रिड बीज PROAGRO 5235 भी आज़माने को उत्साहित हैं, और उन्हें भरोसा है कि यह उनकी उम्मीदों से भी बेहतर साबित होगा।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सुरतपुर बघोड़ा गांव के चांद्रेश बाजपेयी भी पहले कई तरह के हाइब्रिड बीजों को आज़मा चुके थे, लेकिन फसल कभी संतोषजनक नहीं होती थी। अंततः उन्होंने PROAGRO 5222 को अपनाया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
“पहले साल सोचा कि चलो एक बार आज़माकर देखते हैं, लेकिन अब हर साल यही बीज बोता हूं। इसने न सिर्फ फसल में भरपूर उपज दी, बल्कि तेल की मात्रा भी अधिक रही। हमारी आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो चुकी है,” चांद्रेश ने बताया।
वैज्ञानिकों की राय: भरोसे और गुणवत्ता का नाम है PROAGRO
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (बीज अनुसंधान एवं विकास) डॉ. विवपेन डगांवकर का कहना है कि “PROAGRO सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि किसानों के दिलों में रचा-बसा विश्वास है। हमने बीजों की उत्पादकता, तेल प्रतिशत, बीज की मोटाई और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विशेष ध्यान दिया है। विशेष रूप से सरसों में फैलने वाली बीमारियों जैसे स्क्लेरोटिनिया (तना गलन) और सफेद रतुवा के प्रति सहनशील किस्मों पर फोकस किया गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ओरोबांकी खरपतवार से निपटने के लिए भी एक प्रभावी समाधान पर काम कर रही है, जो सरसों की खेती के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

