हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर बड़ा टकराव उभर आया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने हरियाणा सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि अगर 7 अगस्त तक निजी अस्पतालों के बकाया 500 करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए, तो प्रदेशभर में आयुष्मान कार्ड धारकों को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं मिलेगा। इससे लाखों लाभार्थियों के सामने स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
IMA हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. महावीर जैन ने बताया कि जनवरी 2024 में मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात कर निजी अस्पतालों की समस्याओं से अवगत कराया गया था। उस वक्त सरकार की ओर से मार्च 2025 तक भुगतान का आश्वासन मिला था, लेकिन आज तक करीब 500 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं की गई।
उन्होंने कहा, “अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि अस्पतालों के पास सेवाएं जारी रखने का संसाधन नहीं बचा है। मजबूरी में हमें सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं।”
सरकार की अनदेखी और सीमित बजट
IMA ने यह भी मांग की थी कि राज्य सरकार आयुष्मान योजना का वार्षिक बजट 2500 करोड़ रुपये तक बढ़ाए, ताकि मरीजों की संख्या के अनुसार संसाधन सुनिश्चित हो सकें। लेकिन सरकार ने यह बजट 800 करोड़ रुपये तक सीमित रखा है, जो मौजूदा जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है।
डॉ. जैन ने कहा, “बढ़ती जनसंख्या और कार्डधारकों की संख्या को देखते हुए यह बजट ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है।”
आयुष्मान भारत योजना क्या है?
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) भारत सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त इलाज सुविधा उपलब्ध कराना है। हालांकि योजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती है, लेकिन भुगतान की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर होती है।
हरियाणा में कार्डधारकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे योजना पर वित्तीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
अब आगे क्या?
IMA के अल्टीमेटम के बाद अब नजर हरियाणा सरकार पर है कि वह समय रहते भुगतान जारी करती है या नहीं। यदि समाधान नहीं निकला, तो 7 अगस्त के बाद *आयुष्मान कार्ड सिर्फ कागज का टुकड़ा बन जाएंगे* और हजारों मरीज निजी अस्पतालों से वंचित रह सकते हैं।
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