֍:खरीदी में आई तेजी§ֆ:साल 2019-20 के बाद सीसीआई ने दूसरी बार सबसे अधिक कपास की खरीद की है. उस साल 1.05 करोड़ गांठों की खरीद की गई थी. इसी के साथ देश में कुल पैदा होने वाली कपास उपज का एक तिहाई हिस्सा सीसीआई ने खरीद लिया है. पहले लगभग 3 करोड़ गांठों का अनुमान था जिसे घटाकर 294 लाख गांठ कर दिया गया है. वहीं, मंगलवार को संसद को बताया गया कि केंद्र सरकार ने इस साल 25 मार्च तक किसानों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 99.41 लाख गांठ कपास की खरीद की है. कुल 260.11 लाख गांठ कपास की आवक हुई है. इसी तरह, सरकार ने 2023-24 में कपास सीजन के दौरान किसानों से कपास खरीदने के लिए MSP स्कीम के तहत 11,712 करोड़ रुपये खर्च किए.§֍:राज्य मंत्री ने दी जानकारी§ֆ:कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने राज्यसभा को एक लिखित जवाब में बताया कि भारतीय कपास निगम ने किसानों की सहायता की और MSP स्कीम के तहत 32.84 लाख गांठें खरीदीं, जिससे सभी कपास उत्पादक राज्यों में लगभग 7.25 लाख कपास किसानों को लाभ हुआ. सरकार कपास किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए MSP देती है और उचित औसत गुणवत्ता कपास की कीमतों के MSP से नीचे गिरने की किसी भी स्थिति में उन्हें कम दाम पर बिक्री से बचाती है. मंत्री ने कहा कि सरकार के जरिये की गई खरीद से कीमतों को एमएसपी स्तर से नीचे गिरने से रोका जा सकता है. भारतीय कपड़ों की वैश्विक ब्रांडिंग के लिए सरकार ने प्रीमियम क्वालिटी वाले भारतीय कपास को एक खास पहचान देने के लिए कस्तूरी कपास को भारत के ब्रांड ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर किया है.§भारतीय कपास निगम यानि सीसीआई की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास की खरीद चल रही है. इस दौरान 2024-25 मार्केटिंग सीजन के लिए 1 करोड़ गांठ तक खरीद पहुंच गई है. तेलंगाना इन सभी राज्यों की लिस्ट में सबसे ऊपर है. इसके बाद सरकारी खरीद में महाराष्ट्र और गुजरात हैं. सीसीआई के चेयरमैन ललित कुमार ने इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा, अभी तक 1 करोड़ गांठों की खरीद पूरी हो चुकी है और खरीद का काम अभी जारी है. 26 मार्च तक तेलंगाना में 40.38 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 29.34 लाख गांठ, गुजरात में 14.1 लाख गांठ और कर्नाटक में 5.22 लाख गांठ कपास की खरीद की गई. मध्य प्रदेश में 3.95 लाख गांठ जबकि आंध्र प्रदेश में 3.83 लाख गांठ की खरीद की गई है.

