֍:कांग्रेस महासचिव ने कही ये बात§ֆ:जयराम रमेश ने कहा कि ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ प्रधानमंत्री मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं?’ उनका कहना था कि जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब तमिल, संस्कृत, कन्नषड़, तेलुगु, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भारतीय भाषा घोषित किया गया था. जबकि पीएम मोदी के कार्यकाल में जीरो भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है. इसी के साथ, पीएम मोदी ने 11 जुलाई, 2014 को महाराष्ट्रन के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की तरफ से मराठी को शास्त्रीय भारतीय भाषा घोषित करने के लिए प्रस्तुत किए गए सुविचारित मामले पर कुछ नहीं किया. रमेश ने पीएम मोदी पर मराठी संस्कृति के लिए उदासीन होने का आरोप लगाया है. §֍:चीनी मिलों के पास 925 करोड़ का स्टॉक§ֆ:जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर महाराष्ट्रा के चीनी उद्योग को लेकर इल्जााम लगाया है. उन्होंने दावा किया कि इस साल चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के चलते केंद्र सरकार ने इथेनॉल के उत्पादन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. इस वजह से महाराष्ट्र के मिल मालिकों के पास कम से कम 925 करोड़ रुपये का स्टॉक है. केंद्र सरकार की तरफ से लगाए गए प्रतिबंध की वजह से वित्तीय बोझ के अलावा, वे इथेनॉल और स्प्रिट के अपने मौजूदा स्टॉक की वजह से पैदा आग के खतरे के बारे में भी चिंतित हैं. उन्हों ने सवाल किया कि क्याज भाजपा के पास चीनी उद्योग के लिए उनके द्वारा बनाई गई समस्याओं को सुधारने की कोई योजना है? §महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव अब नजदीक आ गए हैं. इसी बीच कई मामलों में राजनीती गरमाई हुई है. कांग्रेस ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वह मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग को ‘अनदेखा’ कर रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि 10 साल तक उन्होंने पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण की तरफ से द्वारा साल 2014 में की गई मांग पर कुछ भी नहीं किया है. कांग्रेस महासचिव और कम्यूानिकेशन इंचार्ज जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के पुणे दौरे से पहले उनसे चार सवाल पूछे. इनमें से मराठी भाषा पर भी एक सवाल था.

