ֆ:प्रतिभागियों ने प्रमुख चुनौतियों को साझा करने में सक्रिय रूप से भाग लिया और घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के अलावा, जलमार्गों में कार्गो मोडल शिफ्ट को तेजी से हासिल करने के लिए सरकार द्वारा संभावित पहल का सुझाव दिया।पत्तंन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री आर लक्ष्मणन ने कहा कि कोच्चि में दो दिवसीय सम्मेलन ने अंतर्देशीय जलमार्गों के हरित परिवर्तन, एक समर्पित क्षेत्रीय समुद्री विकास कोष की स्थापना, घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देने आदि सहित भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं पर समृद्ध चर्चा को सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह सामुद्रिक अमृत काल विजन 2047 में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में समुद्री हितधारकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान करने और उनका समाधान करने के लिए मंत्रालय द्वारा ऐसी कई बैठकों के आयोजन की एक कड़ी है।
§ֆ:उद्घाटन सत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्र में पत्त न, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के कार्बन से मुक्ति के प्रयासों को उजागर किया गया, जिसका नेतृत्व आईडब्यू मु एआई और सीएसएल द्वारा पत्तनन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के हरित नौका दिशानिर्देशों के अनुरूप ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन सेल अंतर्देशीय जहाजों की तैनाती द्वारा किया जा रहा है। पायलट लर्निंग द्वारा विस्तार योजनाओं की जानकारी के साथ, एनडब्ल्यू-1 पर तत्काल तैनाती के लिए वाराणसी को प्रायोगिक स्थेल के रूप में चुना गया है। उल्लेाखनीय है कि बंकरिंग आदि जैसी सुविधाओं के लिए संभावित हितधारकों के साथ चर्चा चल रही है। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि अपने कम उत्सर्जन गुणों के कारण, मेथनॉल को वैश्विक स्तर पर एक्जिम जहाजों के लिए प्रमुख हरित ईंधन में से एक माना जाता है। मायरस्क द्वारा मेथनॉल संचालित जहाजों की तैनाती का हालिया मामला इसका उदाहरण है। इसके साथ अंतर्देशीय जहाजों के हरित परिवर्तन की दिशा में एक प्रगतिशील कदम के रूप में देश में मेथनॉल समुद्री इंजनों के स्वदेशी विकास की संभावनों का पता लगाने का सुझाव दिया गया।
§केन्द्री य पत्तथन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के साथ मिलकर हाल ही में कोच्चि, केरल में दो दिवसीय सम्मेलन (23-24 अप्रैल) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में ‘चैलेंजेस एंड प्रॉस्पेेक्टिव सॉल्यूमशंस इन इनलैंड वाटरवेज एंड शिप बिल्डिंग’ (अंतर्देशीय जलमार्ग और जहाज निर्माण में चुनौतियां और संभावित समाधान) विषयक समुद्री क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने के लिए विभिन्न राज्य विभागों, उद्योग विशेषज्ञों तथा हितधारकों को आमंत्रित किया गया। सम्मेलन में चार व्यावहारिक सत्र शामिल थे, जिनमें समुद्री उद्योग को कार्बन से मुक्तक करने, अंतर्देशीय जल परिवहन और जहाज निर्माण में महत्वपूर्ण चुनौतियों पर विचार करना शामिल था।

