पंजाब के धान के खेतों में एक रहस्यमय बीमारी ने फिर से दस्तक दी है। सदर्न ब्लैक स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस (SRBSDV) ने राज्य के आठ जिलों—लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली, पठानकोट, गुरदासपुर और जालंधर—की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह वायरस धान के पौधों की लंबाई 40% तक घटाकर उन्हें “बौना” बना देता है, जड़ों को कमजोर करता है, और पौधों को सूखने या गिरने पर मजबूर कर देता है। केवल लुधियाना जिले में ही 3,500 हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है, जिससे किसानों को ₹51.35 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
वायरस की उत्पत्ति और प्रसार
- चीन से भारत तक सफर: SRBSDV को पहली बार 2001 में दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रांत में पहचाना गया। यह 2022 में पंजाब में अचानक दिखाई दिया और तब से लगातार फसलों को निशाना बना रहा है।
- वेक्टर की भूमिका: यह वायरस व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर (WBPH) नामक कीट के माध्यम से फैलता है। इसके निम्फ (छोटे लार्वा) हवा के साथ उड़कर वायरस को दूर-दूर तक पहुँचाते हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है ।
- खतरनाक लक्षण: संक्रमित पौधों की जड़ें उथली और भूरी हो जाती हैं, पत्तियाँ सिकुड़कर खड़ी रह जाती हैं, और पौधे आसानी से उखड़ जाते हैं। गंभीर मामलों में उपज 30-40% तक घट सकती है।
आर्थिक प्रभाव और प्रकोप का दायरा
पंजाब में इस साल 34,000 हेक्टेयर धान SRBSDV की चपेट में है, जो राज्य के कुल धान रकबे का 1.35% है। लुधियाना सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहाँ खन्ना ब्लॉक में अकेले 1,500 हेक्टेयर फसल नष्ट हुई। किसानों ने सरकार से तत्काल “गिरदावरी” (क्षति आकलन) और मुआवजे की मांग की है।
वायरस से बचाव के उपाय
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने किसानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- निगरानी तकनीक: साप्ताहिक रूप से पौधों को हल्का झुकाकर थपथपाएँ। यदि WBPH के निम्फ या वयस्क पानी की सतह पर तैरते दिखें, तुरंत कीटनाशक छिड़कें ।
- रोपाई का समय: जून के अंतिम सप्ताह (25 जून के बाद) में रोपाई करें। शुरुआती बुवाई वाली फसलों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
- कीटनाशकों का सावधानीपूर्वक उपयोग:
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कीटनाशक का नाम |
सक्रिय तत्व |
खुराक (प्रति हेक्टेयर) |
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पेक्सालॉन |
ट्राइफ्लूमेजोपाइरिम |
235 मिली |
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ओशीन/डोमिनेंट/टोकन |
डाइनोटेफुरान |
200 ग्राम |
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चेस |
पाइमेट्रोजीन |
300 ग्राम |
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ब्यूप्रोफेजिन 70% |
ब्यूप्रोफेजिन |
0.5 मिली/लीटर पानी |
स्रोत: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग
चेतावनी: कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग न करें। इससे कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है और पर्यावरण को नुकसान पहुँच सकता है।
वैज्ञानिकों की चिंताएँ और भविष्य की रणनीति
- बीज सुरक्षा: IARI के अनुसार, संक्रमित पौधों के बीजों में वायरस नहीं पाया गया। अगले सीजन में इन्हें बोना सुरक्षित है ।
- एकीकृत प्रबंधन: विशेषज्ञ खरपतवार नियंत्रण, संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक कीटनाशकों को समन्वित करने पर जोर देते हैं। PAU ने फ्लैट-फैन नोजल से पौधों के आधार पर छिड़काव करने की सलाह दी है।
- जलवायु जोखिम: नम मौसम और अनियमित मानसून वायरस के प्रसार को बढ़ावा देते हैं। किसानों को खेतों में पानी भरकर न रखने की सलाह दी गई है।
किसानों की आवाज
लुधियाना के प्रगतिशील किसान हरप्रीत सिंह का कहना है, “पिछले साल 10% फसल खराब हुई थी, इस बार नुकसान दोगुना है। सरकार तुरंत हमारी फसल का आकलन करे और MSP के आधार पर मुआवजा दे।”
निष्कर्ष
चीन से आयातित यह वायरस पंजाब की धान खेती के लिए गंभीर खतरा बन गया है। जहाँ वैज्ञानिक WBPH कीट के प्रसार पर नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं किसानों को समय पर निगरानी और रोपाई की तारीखों में बदलाव जैसे उपायों को अपनाना होगा। राज्य सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह प्रभावित क्षेत्रों का त्वरित आकलन करे और किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे।

