राजस्थान सरकार की “मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत योजना 2025–26” के तहत अब तक प्रदेश के 3,410 किसानों को बड़ी राहत दी जा चुकी है। किसानों द्वारा 33 करोड़ रुपए का मूलधन जमा कराने पर सरकार ने 44 करोड़ रुपए की ब्याज राशि माफ कर दी है। यह योजना किसानों को केवल मूलधन अदा करके कर्ज से मुक्त होने का अवसर दे रही है।
राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही यह एकमुश्त समझौता योजना (OTS) किसानों के साथ-साथ लघु उद्यमियों को भी राहत पहुंचा रही है। योजना का मकसद उन किसानों को आर्थिक राहत देना है, जिनके खाते भूमि विकास बैंकों में “अवधिपार” घोषित हो चुके हैं।
55 लाख का ऋण निपटा, जमीन भी वापस मिली
अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ निवासी किसान बलजीत मेव की कहानी इस योजना की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है। बलजीत ने 18.61 लाख रुपये का मूलधन जमा कराया, जिसके बदले सरकार ने 37.23 लाख रुपये का ब्याज माफ कर दिया। अब उनका कुल ₹55.84 लाख का ऋण पूरी तरह समाप्त हो चुका है। इससे पहले उनकी जमीन बैंक के नाम हो चुकी थी, लेकिन योजना का लाभ लेकर वे अपनी जमीन दोबारा अपने नाम कराने में सफल रहे।
30 हजार से ज्यादा किसान उठा सकते हैं लाभ
राज्य के 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों के 30,010 ऋणी सदस्य इस योजना के पात्र हैं। यदि ये किसान कुल 326 करोड़ रुपये का मूलधन जमा करते हैं, तो सरकार 534 करोड़ रुपये तक की ब्याज राहत देने को तैयार है। इससे किसानों पर ब्याज का भारी बोझ नहीं रहेगा और वे कर्जमुक्त हो सकेंगे।
कैसे उठाएं योजना का लाभ?
यदि आपने भी भूमि विकास बैंक से ऋण लिया है और वह ‘अवधिपार’ हो चुका है, तो इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको बैंक से संपर्क करना होगा। पात्रता की पुष्टि के बाद, आपको मूलधन की राशि एकमुश्त जमा करनी होगी, जिसके बाद ब्याज माफ किया जाएगा और आपका खाता निपट जाएगा।
आवश्यक दस्तावेज:
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आधार कार्ड / वोटर ID / पैन कार्ड
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पता प्रमाण पत्र (राशन कार्ड, बिजली/पानी बिल आदि)
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भूमि स्वामित्व प्रमाण (जमाबंदी / खतौनी आदि)
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बैंक पासबुक और ऋण खाता स्टेटमेंट
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पासपोर्ट साइज फोटो (2-3 प्रति)
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भरा हुआ आवेदन पत्र
सरकार का दावा: गांव-गांव तक पहुंच रहा लाभ
सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक के अनुसार, योजना का प्रचार-प्रसार तेज़ी से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों में जागरूकता बढ़ी है। अब वे वर्षों से अटके खातों को निपटाने के लिए सामने आ रहे हैं।
इस योजना से किसानों के साथ-साथ ग्रामीण लघु उद्यमियों को भी राहत मिल रही है, जिससे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

