֍:जानें रोग के बारे में सभी जानकारी§ֆ:मुर्गी में होने वाला सफेद दस्त रोग काफी खतरनाक हो सकता है. ये बीमारी आमतौर पर चूजों में देखी गई है. वहीं बड़ी मुर्गियों में ये बीमारी कम देखी गई है. यह एक प्रकार का संक्रमक रोग है. इस बीमारी से संक्रमित मुर्गियों के अंडों में भ्रूण मर जाते हैं. बीमार मुर्गियों का मल सफेद होता है और मल त्याग के दौरान उन्हें दर्द होता है. दस्त के कारण चूजों और मुर्गियों का पिछला हिस्सा चिपचिपा हो जाता है.§֍:ऐसे करें इलाज§ֆ:मुर्गी या चूजे को रोग लग जाने पर उसे तुरंत पास के पशु चिकित्सक के पास लेकर जाएं. इसके बाद 20 चूजों या 5 बड़ी मुर्गियों के लिए 2 चुटकी दवा एक कप पानी में घोलें और बीमार चूजों को 2-2 बूंद करके पिला दें. ऐसा करने से मुर्गियों में ताकत बढ़ेगी और बीमारी से जल्द उभर पाएंगे. इसी के साथ मुर्गियों के आसपास साफ सफाई रखें, इससे वे गंदे नहीं होंगे और कीड़े लगने का भी डर नहीं रहेगा. §भारत में किसान मुर्गी पालन काफी जोरो शोरों से करता है. इसकी खेती से किसानों को काफी मुनाफा होता है, क्योंकि मार्केट में मुर्गियों की डिमांड हमेशा रहता ही है. ऐसे में मुर्गी जैसी कमजोर जानवर को मानसून के समय में रोग लग जाना आम बात. इससे जल्दी पीछा छुड़ाने के लिए लोग इन्जेक्शन और वैक्सीन का प्रयोग करते हैं. ऐसे में उनकी मुर्गियां मानसून की शुरुआत में ही सुरक्षित हो जाती हैं. देश में मुर्गी पालन कुछ सालों में काफी प्रच्चलन में आ गया है. किसानों ने अब अपना पोल्ट्री फॉर्म खोलना शुरु कर दिया है. इस कारोबार में उन्हें काफी मुनाफा हो जता है. मुर्गियों में होने वाली कुछ बीमारी की वजह से मुर्गीपालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. मुर्गियों में इस मौसम में दस्त का रोग लग जाना आम बात है. लेकिन इस बीमारी के बहुत ज्यादा फैल जाने से मुर्गी की मृत्यु भी हो सकती है.

