֍:मुख्य वक्ताओं ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार§ֆ:
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. एस.के. चौधरी, महानिदेशक, एफएआई, ने टिकाऊ कृषि के लिए प्रकृति-सकारात्मक समाधानों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “संतुलित उर्वरक उपयोग और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाकर हम कृषि उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।”
श्री हरमेल सिंह सिद्धू, स्टेट मार्केटिंग मैनेजर, इफको, चंडीगढ़, ने नैनो उर्वरक प्रौद्योगिकी के बारे में बताया कि यह पोषक तत्वों को पौधों तक सीधे पहुँचाती है, जिससे दक्षता बढ़ती है। उन्होंने कहा, “सरकार नैनो तकनीक आधारित उत्पादों को बढ़ावा दे रही है, जो किसानों के लिए फायदेमंद है।”
श्री बाल मुकंद शर्मा, अध्यक्ष, पंजाब राज्य खाद्य आयोग, ने खाद्य सुरक्षा और किसानों के अधिकारों पर जोर देते हुए कहा, “हम किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करेंगे और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करेंगे।”
§֍:विशेषज्ञों ने दी किसानों को अहम जानकारी§ֆ:• डॉ. ए. वेलमुरुगन, उप महानिदेशक, आईसीएआर, ने स्थायी मृदा एवं जल प्रबंधन पर चर्चा की।
• डॉ. एस.एल. जाट, आईसीएआर-आईआईएमआर, ने संरक्षण कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी।
• डॉ. महेश्वरन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ने मिट्टी में जैविक कार्बन की महत्ता बताई।
§֍:किसानों के लिए प्रमुख सुझाव§ֆ:1. फसल विविधीकरण: गेहूं-धान के बजाय चना, मक्का, मूंग जैसी फसलें उगाएँ।
2. जैविक खाद: गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट और हरी खाद का प्रयोग करें।
3. मिट्टी जाँच: हर 2-3 साल में मिट्टी की जाँच करवाएँ।
4. जल संरक्षण: ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, वर्षा जल संचयन और डीएसआर तकनीक अपनाएँ।
5. पराली प्रबंधन: पराली न जलाएँ, इसे खाद या हैप्पी सीडर से प्रबंधित करें।
§֍:FAI ने किया आभार व्यक्त §ֆ:एफएआई ने इफको, रिलायंस इंडस्ट्रीज और न्यू एआरवी का विशेष धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।§ֆ:समापन भाषण में कहा गया कि “किसानों की मेहनत और वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय से ही भारतीय कृषि का भविष्य उज्ज्वल होगा।”§֍:जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान!§चंडीगढ़: फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के तत्वावधान में टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों, डीलर्स, कृषि विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया, जहाँ आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण पर विस्तृत चर्चा हुई।
चंडीगढ़: IFFCO भवन में FAI ने आयोजित किया एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम#chandigarh #fai #fertilizerassociationofindia #iffco #fasalkranti pic.twitter.com/sk6rjwRGeW
— FASAL KRANTI (@Fasal_Kranti) May 20, 2025
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. एस.के. चौधरी, महानिदेशक, एफएआई, ने टिकाऊ कृषि के लिए प्रकृति-सकारात्मक समाधानों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “संतुलित उर्वरक उपयोग और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाकर हम कृषि उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।”
श्री हरमेल सिंह सिद्धू, स्टेट मार्केटिंग मैनेजर, इफको, चंडीगढ़, ने नैनो उर्वरक प्रौद्योगिकी के बारे में बताया कि यह पोषक तत्वों को पौधों तक सीधे पहुँचाती है, जिससे दक्षता बढ़ती है। उन्होंने कहा, “सरकार नैनो तकनीक आधारित उत्पादों को बढ़ावा दे रही है, जो किसानों के लिए फायदेमंद है।”
श्री बाल मुकंद शर्मा, अध्यक्ष, पंजाब राज्य खाद्य आयोग, ने खाद्य सुरक्षा और किसानों के अधिकारों पर जोर देते हुए कहा, “हम किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करेंगे और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करेंगे।”
§֍:विशेषज्ञों ने दी किसानों को अहम जानकारी§ֆ:• डॉ. ए. वेलमुरुगन, उप महानिदेशक, आईसीएआर, ने स्थायी मृदा एवं जल प्रबंधन पर चर्चा की।
• डॉ. एस.एल. जाट, आईसीएआर-आईआईएमआर, ने संरक्षण कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी।
• डॉ. महेश्वरन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ने मिट्टी में जैविक कार्बन की महत्ता बताई।
§֍:किसानों के लिए प्रमुख सुझाव§ֆ:1. फसल विविधीकरण: गेहूं-धान के बजाय चना, मक्का, मूंग जैसी फसलें उगाएँ।
2. जैविक खाद: गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट और हरी खाद का प्रयोग करें।
3. मिट्टी जाँच: हर 2-3 साल में मिट्टी की जाँच करवाएँ।
4. जल संरक्षण: ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, वर्षा जल संचयन और डीएसआर तकनीक अपनाएँ।
5. पराली प्रबंधन: पराली न जलाएँ, इसे खाद या हैप्पी सीडर से प्रबंधित करें।
§֍:FAI ने किया आभार व्यक्त §ֆ:एफएआई ने इफको, रिलायंस इंडस्ट्रीज और न्यू एआरवी का विशेष धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।§ֆ:समापन भाषण में कहा गया कि “किसानों की मेहनत और वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय से ही भारतीय कृषि का भविष्य उज्ज्वल होगा।”§֍:जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान!§चंडीगढ़: फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के तत्वावधान में टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों, डीलर्स, कृषि विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया, जहाँ आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण पर विस्तृत चर्चा हुई।

