देश में प्रमुख फसलों की उपज को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई शुरुआत करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोयाबीन उत्पादन पर केंद्रित एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। इस क्रम में इंदौर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें सोयाबीन उत्पादक राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए।
यह बैठक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य देश में सोयाबीन की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए समन्वित रणनीति तैयार करना था।
खेत का दौरा और किसानों से सीधा संवाद
बैठक से पूर्व केंद्रीय मंत्री केंद्रीय कृषि मंत्री ने इंदौर के समीपवर्ती एक खेत का दौरा कर सोयाबीन की खेती का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी समस्याएं और अनुभव सुने। इसके साथ ही उन्होंने एक आधुनिक “फार्म रिसोर्स हब” का शिलान्यास किया, जो किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और संसाधनों की उपलब्धता में सहायक बनेगा।
राज्यों और उद्योग के साथ गहन विचार-विमर्श
इस बैठक में मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के कृषि मंत्रियों सहित अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, सोयाबीन से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO), प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, बीज कंपनियां, अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए। बैठक में सोयाबीन की खेती से जुड़ी चुनौतियों, नई तकनीकों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और बेहतर किस्मों के विकास पर चर्चा की गई।
आत्मनिर्भरता की दिशा में ‘तेल बीज मिशन’
बैठक में ‘राष्ट्रीय तिलहन मिशन’ के तहत चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में रणनीति बनाई गई। सोयाबीन, जो खाद्य तेलों का एक प्रमुख स्रोत है, उसकी पैदावार को वैज्ञानिक विधियों से बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान
कृषि मंत्री केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि “विकसित कृषि संकल्प अभियान” जैसे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और अब समय है कि अनुसंधान को जमीन से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थान और नीति निर्माता मिलकर ऐसी रणनीति बनाएं जो फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय को भी सुनिश्चित करे।
आगामी बैठकों की योजना
इस बैठक को केंद्र सरकार की उस नई रणनीति का हिस्सा बताया गया, जिसके अंतर्गत अब प्रत्येक प्रमुख फसल पर राज्यवार और उपजवार विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी। सोयाबीन के बाद दलहन, तिलहन, गन्ना, कपास और अन्य प्रमुख फसलों पर भी इसी तरह की चर्चाएं अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जाएंगी।
यह पहल न केवल देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक और शोध आधारित समाधान देने के उद्देश्य से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

