केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक (GDS) सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘डाक परिवार’ के साथ अपनी गहरी आत्मीयता व्यक्त की और भारतीय डाक विभाग के भविष्य के लिए एक स्पष्ट और जनकेंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
श्री सिंधिया ने कहा कि भारतीय डाक का नेटवर्क न केवल देश का, बल्कि दुनिया का सबसे व्यापक और गहराई तक फैला हुआ वितरण तंत्र है। “कश्मीर से कन्याकुमारी और भरूच से धर्मनगर तक फैले 1.64 लाख डाक सेवा केंद्रों के जरिए भारतीय डाक हर कोने तक पहुंच रखता है। यह केवल एक विभाग नहीं, बल्कि एक परिवार है,” उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा।
उन्होंने ग्रामीण डाक सेवकों को ‘गांव-गांव में भरोसे का स्तंभ’ बताते हुए कहा कि वे न केवल डाक पहुंचाते हैं, बल्कि हर ग्रामीण परिवार के साथ एक भावनात्मक रिश्ता रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब हर कर्मचारी मिशन का हिस्सा खुद को समझता है, तभी असली बदलाव की शुरुआत होती है।सम्मेलन में उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डाकघरों को ‘सिटीजन हब’ के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि डाकघर ग्रामीण भारत में शासन का पहला दरवाजा बनें — आसान पहुंच वाले, आधुनिक सुविधाओं से युक्त और सेवा समृद्ध केंद्र।”
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उत्कृष्ट सेवा के लिए कई ग्रामीण डाक सेवकों को सम्मानित भी किया। उन्होंने डाक परिवार से आह्वान किया कि वे इस परिवर्तन की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें और ग्रामीण भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।सम्मेलन के समापन पर उनका जोशीला और प्रेरणादायक संदेश सुनकर उपस्थित डाक सेवकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ समर्थन जताया और इस मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
“हर डाकघर ग्रामीण जीवन की धड़कन बनेगा और हर डाक सेवक उस परिवर्तन का वाहक,” केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया.

