पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा राज्य कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब सरकार के सहयोग से जिला मोगा के गांव मेहना में एक संयुक्त किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य किसानों को खेतों में पक्षियों और अन्य कशेरुकी (vertebrate) कीटों द्वारा की जाने वाली क्षति से बचाव के उपायों की जानकारी देना था।
शिविर में विभागाध्यक्ष और प्रमुख पक्षी विज्ञानी डॉ. तेजदीप कौर क्लेर ने पंजाब में पक्षियों की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेतों और बागवानी फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले शिकारी पक्षियों से बचाव के लिए कौन-कौन से प्रभावी तरीके अपनाए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में उपयोगी पक्षियों के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि पेड़ लगाना और कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
इस अवसर पर डॉ. राजविंदर सिंह, प्राणी विज्ञानी, ने खरीफ फसलों में होने वाले कशेरुकी कीटों द्वारा नुकसान और उनके प्रबंधन पर आधारित व्याख्यान दिया। उन्होंने किसानों को बताया कि समय पर पहचान और उचित उपायों से इन कीटों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
वरिष्ठ पक्षी विज्ञानी डॉ. मनोज कुमार ने किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया और कशेरुकी कीटों के प्रबंधन से संबंधित साहित्य भी वितरित किया, जिससे किसानों को सही जानकारी सही समय पर मिल सके।
वहीं, कृषि विकास अधिकारी श्री परमपाल सिंह ने किसानों को राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न लाभकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने धान की फसल के लिए अपनाई जाने वाली सिफारिशी कृषि विधियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
इस जागरूकता शिविर में स्थानीय किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। इस तरह के कार्यक्रम किसानों को विज्ञान आधारित खेती की ओर प्रेरित करते हैं और कृषि में स्थायित्व एवं लाभप्रदता सुनिश्चित करने में सहायक होते हैं।

