भारत सरकार की “मेरा गाँव मेरी धरोहर (MGMD)” योजना के तहत देश के ग्रामीण सांस्कृतिक वैभव को संरक्षित करने की दिशा में अहम प्रगति हुई है। इस योजना के अंतर्गत पूरे देश के लगभग 6.5 लाख गांवों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से अब तक लगभग 4.7 लाख गांवों की सांस्कृतिक जानकारी को MGMD पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह योजना हर गाँव की भाषाई, सांस्कृतिक और विरासतीय विशेषताओं जैसे – मंदिरों की वास्तुकला, लोक कलाएं, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां (जैसे सिद्ध चिकित्सा) और शास्त्रीय परंपराओं को डिजिटल रूप में संरक्षित करती है।
तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान को भी मिल रहा है महत्व
तमिलनाडु राज्य में कुल 19,219 गांवों में से 14,251 गांवों की जानकारी पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड की जा चुकी है। इन गांवों की विशिष्ट पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जन-सहभागिता को प्रोत्साहन
“मेरा गाँव मेरी धरोहर” पोर्टल पर crowdsourcing विकल्प उपलब्ध है, जिसके माध्यम से स्थानीय लोग अपने गांवों की सांस्कृतिक जानकारी स्वयं अपलोड कर सकते हैं। यह एक अनूठा प्रयास है जो ग्रामवासियों को अपनी विरासत के संरक्षण में भागीदार बनाता है।
आर्थिक या कौशल विकास लाभ नहीं
हालांकि, यह योजना केवल सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण तक ही सीमित है और गांवों के लिए किसी आर्थिक सहायता या कौशल विकास योजना को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
डिजिटल और शैक्षिक प्रयासों से सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
भारत सरकार गांवों की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, सांस्कृतिक पर्यटन और शैक्षिक पहलों के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर रही है। पारंपरिक कलाओं के प्रदर्शन, सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी और डिजिटल माध्यमों से जागरूकता फैलाने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।
“मेरा गाँव मेरी धरोहर” योजना भारत के ग्रामीण अंचलों की अद्वितीय विरासत को संरक्षित और सहेजने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इस योजना के माध्यम से भारत के गांवों की लोक-परंपराएं, कलाएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का एक मजबूत आधार तैयार किया जा रहा है।

